छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज 120 सरेंडर नक्सली पहुंचे और सदन की कार्यवाही के साक्षी बने. इनमें 1 करोड़ इनामी रुपेश और झीरम हमले का मास्टरमाइंड 25 लाख इनामी चैतू शामिल है. कल रात डिप्टी सीएम विजय शर्मा के घर रेड कार्पेट पर डिनर हुआ जहां सहज संवाद चला. गृह मंत्री ने बताया 2937 नक्सली पुनर्वासित हो चुके हैं. यह घटना बस्तर में शांति और मुख्यधारा में लौटने की बड़ी सफलता है.
रायपुर में आत्मसमर्पित नक्सलियों ने विधानसभा में कार्यवाही को देखा.
रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जो राज्य के बदलते माहौल की जीती जागती तस्वीर पेश कर रहा है. माओवादी विचारधारा को अलविदा कह चुके 120 पूर्व नक्सली आज सदन की कार्यवाही के प्रत्यक्ष साक्षी बने. ये वे लोग हैं जिन्होंने कभी बंदूक उठाकर हिंसा का रास्ता चुना था लेकिन अब संविधान और लोकतंत्र की राह पर चल रहे हैं. इनमें 1 करोड़ रुपये के इनामी रुपेश और 25 लाख के इनामी चैतू जैसे नाम शामिल हैं जिनका अतीत बस्तर के जंगलों से जुड़ा रहा. चैतू 2013 के झीरम घाटी हमले का मास्टरमाइंड माना जाता है जिसमें दर्जनों कांग्रेस नेता शहीद हुए थे. तीन महीने पहले जगदलपुर में सरेंडर करने वाले चैतू आज टोपी पहने सदन की गैलरी में बैठकर विधायकों की बहस सुन रहे थे. यह क्षण सिर्फ एक विजिट नहीं बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए संदेश है जो अभी भी जंगलों में भटक रहे हैं कि बंदूक छोड़ने के बाद सम्मानजनक जीवन संभव है. सुरक्षा जांच के बाद इन्हें अंदर भेजा गया और वे पूरे सत्र के दौरान शांतिपूर्वक बैठे रहे. यह घटना छत्तीसगढ़ सरकार की पुनर्वास नीति की बड़ी कामयाबी साबित हो रही है जो न केवल हिंसा रोक रही है बल्कि पूर्व नक्सलियों को लोकतंत्र का हिस्सा बना रही है.
कल रात जब ये 120 पूर्व नक्सली उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा के नवा रायपुर स्थित आवास पहुंचे तो माहौल बिल्कुल अलग था. लाल कालीन बिछाया गया फूलों की वर्षा की गई और डिप्टी सीएम ने खुद इन भाई बहनों के साथ भोजन किया. कोई प्रोटोकॉल नहीं कोई दूरी नहीं बस सहज संवाद. विजय शर्मा ने एक एक से पूछा रायपुर में कहां घूमे शहर कैसा लगा और दो दिन पहले पहुंचे युवक को पर्यटन स्थलों की सलाह भी दी. माहौल इतना पारिवारिक था कि कोई सोच भी नहीं सकता था ये वही लोग हैं जो कभी सुरक्षाबलों के लिए चुनौती थे. यह डिनर सिर्फ भोजन नहीं बल्कि विश्वास का पुल था जो सरकार और पूर्व नक्सलियों के बीच बन रहा है. आज सुबह ये सभी विधानसभा पहुंचे जहां सदन की भव्य इमारत देखकर उनकी आंखों में चमक थी. यह दौरा उन्हें दिखा रहा है कि लोकतंत्र में हर आवाज सुनी जाती है और बदलाव संवाद से संभव है. सरकार का यह कदम बस्तर में शांति स्थापना की दिशा में मील का पत्थर है जहां नक्सलवाद अब अंतिम सांसें ले रहा है.
डिप्टी सीएम आवास पर भव्य रात्रिभोज
गुरुवार रात विजय शर्मा के आवास पर आयोजित डिनर कार्यक्रम ने पूरे कार्यक्रम की शुरुआत की. रेड कार्पेट और गुलाब की पंखुड़ियों से स्वागत के बाद डिप्टी सीएम ने सभी से व्यक्तिगत रूप से बात की. पूर्व सीसीएम सोनू दादा एसजेडसीएम चैतू दादा और सतीश जैसे पूर्व कमांडरों समेत पूरा समूह वहां मौजूद था. यह संवाद न केवल मनोवैज्ञानिक समर्थन दे रहा है बल्कि मुख्यधारा में लौटने वालों को परिवार का अहसास करा रहा है.
विधानसभा पहुंच और सुरक्षा प्रक्रिया
सुबह विधानसभा परिसर में पहुंचने पर सभी की कड़ी सुरक्षा जांच हुई. इसके बाद इन्हें गैलरी में विशेष सीटों पर बिठाया गया जहां वे सदन की कार्यवाही देख रहे थे. पहली बार लोकतंत्र के मंदिर में बैठकर ये पूर्व नक्सली महसूस कर रहे थे कि बैलेट की ताकत बंदूक से कहीं ज्यादा मजबूत है.
झीरम हमले का मास्टरमाइंड चैतू की कहानी
25 लाख इनामी चैतू उर्फ श्याम दादा 2013 के झीरम घाटी हमले का मुख्य सूत्रधार था जिसमें 30 से ज्यादा कांग्रेस नेता शहीद हुए थे. करीब 35 साल जंगलों में बिताने के बाद नवंबर 2025 में 10 साथियों के साथ सरेंडर किया. आज टोपी पहने सदन में बैठे चैतू खुद को नया जीवन शुरू करने वाले व्यक्ति के रूप में महसूस कर रहे थे. विधानसभा में गृह मंत्री विजय शर्मा ने खुद बताया कि अब तक 2937 नक्सली पुनर्वास नीति का लाभ लेकर मुख्यधारा में लौट चुके हैं. नई 2025 नीति के तहत इनाम राशि कौशल प्रशिक्षण भूमि आवास और रोजगार का प्रावधान है. सात पुनर्वास केंद्रों में 1700 से ज्यादा पूर्व नक्सली प्रशिक्षण पूरा कर चुके हैं.
About the Author
सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.