Raipur News: यहां विवाह में सात फेरे लेना अनिवार्य माना जाता है और खास बात यह है कि सभी सात फेरों में दुल्हन ही आगे चलती है, जो इस क्षेत्र की सांस्कृतिक और सामाजिक विशिष्टता को दर्शाता है.
लोकाचार पर आधारित परंपरा
स्थानीय विद्वानों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में सात फेरों की यह परंपरा लोकाचार पर आधारित है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है. जनमानस में यह मान्यता है कि सात फेरे जीवन के सात मूल स्तंभ धार्मिक आस्था, निष्ठा, समर्पण, प्रेम, सुरक्षा, संतोष और सात्विक जीवन का प्रतीक हैं, इसलिए यहां की शादियों में इन फेरों को अत्यंत पवित्र माना जाता है.
सात फेरों की परंपरा अटल
रात के समय लिया जाने वाला यह फेरा विवाह समारोह की गरिमा बढ़ाता है. आमतौर पर अग्नि कुंड की रोशनी, मंत्रोच्चार और वर-कन्या के धीमे कदमों के बीच यह रस्म पूरी होती है, जहां पूरा परिवार और समाज उनके नए जीवन की मंगलकामनाएं करता है. आज भी छत्तीसगढ़ में चाहें आधुनिकता कितनी भी बढ़ जाए, सात फेरों की यह परंपरा अटल है. यह केवल विवाह का संस्कार नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव का एक जीवंत प्रतीक है, जिसे जनसामान्य पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ निभाता आ रहा है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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