छत्तीसगढ़ विधानसभा में स्कूल शिक्षा विभाग का 22,466 करोड़ रुपये का बजट पास हो गया है. इस बजट में शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और समावेशी बनाने पर जोर दिया गया है. राज्य में 150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय स्थापित किए जाएंगे और सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से योग व वैदिक गणित की पढ़ाई शुरू होगी. साथ ही छात्रों को डिजिटल मार्कशीट और ऑनलाइन ट्रांसफर सर्टिफिकेट की सुविधा भी दी जाएगी.
राजनीतिक दृष्टि से भी यह बजट महत्वपूर्ण माना जा रहा है. शिक्षा क्षेत्र में बड़े निवेश के जरिए सरकार यह संदेश देना चाहती है कि राज्य में शिक्षा सुधार उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है. ग्रामीण क्षेत्रों में उत्कृष्ट स्कूल खोलने का निर्णय उन इलाकों के छात्रों को बेहतर शिक्षा देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जहां अब तक निजी स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूलों की सुविधाएं सीमित रही हैं. डिजिटल मार्कशीट और ऑनलाइन ट्रांसफर सर्टिफिकेट जैसी व्यवस्थाएं भी प्रशासनिक पारदर्शिता और आधुनिक तकनीक को शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने का प्रयास मानी जा रही हैं.
150 विवेकानंद स्कूलों से ग्रामीण शिक्षा पर फोकस
सरकार ने राज्य में 150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय स्थापित करने की घोषणा की है. इन स्कूलों के लिए बजट में 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इन स्कूलों को ग्रामीण ब्लॉकों में विकसित करने की योजना है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गांवों के छात्रों को भी शहरों जैसी गुणवत्ता वाली शिक्षा मिल सके.
योग और वैदिक गणित पर जोर
नई शिक्षा व्यवस्था में पहली कक्षा से ही योग और वैदिक गणित को पाठ्यक्रम में शामिल करने की योजना बनाई गई है. सरकार का मानना है कि इससे छात्रों के मानसिक और शारीरिक विकास में संतुलन आएगा. शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार योग बच्चों की एकाग्रता और अनुशासन बढ़ाने में सहायक होता है. वहीं वैदिक गणित गणना की क्षमता को तेज बनाने में उपयोगी माना जाता है.
डिजिटल शिक्षा व्यवस्था की ओर कदम
राज्य सरकार ने छात्रों के शैक्षणिक दस्तावेजों को डिजिटल बनाने की दिशा में भी पहल की है. मार्कशीट और ट्रांसफर सर्टिफिकेट अब ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएंगे. इन दस्तावेजों पर क्यूआर कोड और यूनिक आईडी दी जाएगी. इससे दस्तावेजों की सत्यता को ऑनलाइन जांचना आसान होगा और फर्जीवाड़े की संभावना कम होगी.
शिक्षा सुधार की चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि शिक्षा क्षेत्र में बड़े बजट की घोषणा सकारात्मक संकेत है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल बजट बढ़ाने से ही शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार नहीं होता. शिक्षकों की उपलब्धता, स्कूलों की आधारभूत संरचना और प्रशिक्षण जैसी चुनौतियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं. अगर इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया तो यह बजट राज्य की शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक बदलाव ला सकता है.
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सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें
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