छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बेलटुकरी गांव के किसान पुत्र संजय डहरिया ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ाई जीतकर UPSC परीक्षा में 946वीं रैंक हासिल की है. करीब सात से आठ साल तक कैंसर से जूझने के बाद उन्होंने 2022 में UPSC की तैयारी शुरू की और चार साल की मेहनत के बाद सफलता पाई. उनकी कहानी संघर्ष, साहस और हौसले की प्रेरणादायक मिसाल है.
महासमुंद के छोटे से गांव के संजय डहरिया ने सबसे कठिन परीक्षा पास की है.
रायपुर/महासमुंद. छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के छोटे से गांव बेलटुकरी के किसान परिवार में जन्मे संजय डहरिया ने बेहद कठिन परिस्थितियों में अपने सपने को जिंदा रखा. बचपन से आर्थिक तंगी, घर की जिम्मेदारियां और पढ़ाई की चुनौतियों के बीच उन्होंने एक बड़ा सपना देखा था-देश की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाने वाली UPSC को पास करने का. लेकिन उनकी जिंदगी में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब पढ़ाई के बीच उन्हें कैंसर जैसी गंभीर बीमारी ने घेर लिया. इस बीमारी ने उनके जीवन को कई वर्षों तक संघर्ष और दर्द में डाल दिया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. UPSC परीक्षा 2025 में 946वीं रैंक हासिल कर उन्होंने ऐसा इतिहास रचा है, जिसने हजारों युवाओं को प्रेरित कर दिया है. यह कहानी सिर्फ एक परीक्षा में सफलता की नहीं बल्कि जिंदगी से जंग जीतने की भी है.
लंबे समय तक बीमारी से लड़ने के बाद जब संजय स्वस्थ हुए, तब उन्होंने अपने सपने को फिर से जिंदा किया. कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से उबरना ही किसी बड़ी जीत से कम नहीं था, लेकिन संजय यहीं नहीं रुके. उन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य तय किया और पूरी मेहनत के साथ UPSC की तैयारी में जुट गए. चार वर्षों तक लगातार पढ़ाई और संघर्ष के बाद उन्होंने UPSC परीक्षा 2025 में 946वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार और गांव का नाम रोशन कर दिया.
महासमुंद के छोटे गांव से शुरू हुआ सफर
संजय डहरिया छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बेलटुकरी गांव के रहने वाले हैं. उनका परिवार एक साधारण किसान परिवार है. पिता लखन डहरिया खेती करते हैं और माता रेशम डहरिया गृहिणी हैं. आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद माता-पिता ने हमेशा अपने बेटे की पढ़ाई को प्राथमिकता दी. संजय ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से की. बाद में उनका चयन नवोदय विद्यालय में हो गया, जहां उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की. इसी दौरान उन्होंने पहली बार एक आईएएस अधिकारी को देखा और उसी समय उन्होंने तय कर लिया कि उन्हें भी प्रशासनिक सेवा में जाना है.
कैंसर से लंबी और दर्दनाक लड़ाई
संजय के जीवन का सबसे कठिन दौर 2012 में शुरू हुआ. उन्हें कान के पास कैंसर का पता चला. इस बीमारी ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया. इलाज के लिए उन्हें मुंबई के टाटा मेमोरियल अस्पताल में कई वर्षों तक इलाज कराना पड़ा. करीब सात से आठ वर्षों तक उन्होंने कैंसर से लड़ाई लड़ी. इस दौरान कई बार ऑपरेशन और इलाज की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा. आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए यह समय बेहद कठिन था, लेकिन माता-पिता ने बेटे के इलाज में कोई कमी नहीं आने दी.
बीमारी से उबरने के बाद फिर शुरू किया सपना
साल 2018-19 के आसपास जब संजय कैंसर से पूरी तरह उबर गए, तब उन्होंने अपने पुराने सपने को फिर से जिंदा किया. उन्होंने तय किया कि अब वे UPSC की तैयारी करेंगे. साल 2022 में उन्होंने रायपुर में किराए पर छोटा सा कमरा लेकर तैयारी शुरू की. चौबे कॉलोनी में लगभग 100 स्क्वायर फीट के कमरे में रहकर उन्होंने पढ़ाई की. नालंदा परिसर की लाइब्रेरी में रोजाना सुबह से रात तक पढ़ाई करते थे. लगातार चार साल तक कड़ी मेहनत करने के बाद संजय को UPSC परीक्षा 2025 में सफलता मिली. उन्होंने 946वीं रैंक हासिल की. संजय का कहना है कि उनकी सफलता में माता-पिता के त्याग और परिवार के समर्थन की बड़ी भूमिका रही है. उनका सपना अब प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज के लिए काम करना है.
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सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें
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