Holika Pujan: रायपुर में होलिका दहन के अवसर पर एक अनोखी परंपरा है, जिसमें निःसंतान दंपत्तियों को प्रहलाद की मूर्ति 10-12 दिन के लिए अपने घर ले जाने की परमिशन दी जाती है. माना जाता है कि इससे उन्हें संतान प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है.
कब से निभाई जा रही परंपरा?
यह परंपरा पिछले तीन दशकों से लगातार निभाई जा रही है और इसमें केवल रायपुर ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों के साथ-साथ दूसरे राज्यों से भी निःसंतान दंपत्ति शामिल होते हैं. लोग इस परंपरा में गहरी आस्था रखते हैं और इसे अपनी धार्मिक व सांस्कृतिक श्रद्धा का हिस्सा मानते हैं. स्थानीय लोग और मंदिर प्रशासन इस परंपरा को बड़े धूमधाम और अनुशासन के साथ संपन्न कराते हैं. होलिका दहन के साथ-साथ पूजा-अर्चना और रंगारंग कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं. इस अवसर पर दंपत्तियों की खुशी और उम्मीद साफ दिखाई देती है, क्योंकि वे इस परंपरा के जरिए अपने जीवन में संतान प्राप्ति की कामना करते हैं.
इस अनोखी परंपरा ने समय के साथ न केवल स्थानीय लोगों में बल्कि दूर-दराज के राज्यों में भी प्रसिद्धि पाई है. प्रहलाद की मूर्ति को घर ले जाने वाले दंपत्तियों का विश्वास है कि यह आस्था और विश्वास उन्हें आने वाले समय में खुशहाली और परिवार में संतति का आशीर्वाद देती है.
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