शैलेन्द्र ने लोकल 18 को बताया कि बनारसी पान को खास बनाने के लिए वे पारंपरिक और प्रीमियम सामग्री का इस्तेमाल करते हैं. इसमें गुलकंद, लच्छा, कतरी, चेरी, वाइट कोपरा, रंगीन कोपरा, सौंफ और इलायची जैसे आइटम डाले जाते हैं, जिससे पान का स्वाद और खुशबू दोनों ही अलग स्तर पर पहुंच जाते हैं. उनका मानना है कि बनारसी पान सिर्फ खाने की चीज नहीं, बल्कि एक अनुभव है, जिसे लोग बार-बार लेना पसंद करते हैं.
सोशल मीडिया पर कर रहा ट्रेंड
रायपुर में शैलेन्द्र का फायर पान भी लोगों की जुबान पर छाया हुआ है. फायर पान की तारीफ और इसका ट्रेंड आज भी सोशल मीडिया से लेकर आम बातचीत तक में सुनने को मिलता है. फायर पान बनाने की तरकीब के बारे में पूछे जाने पर शैलेन्द्र मुस्कुराते हुए कहते हैं कि हर किसी को अपना बिजनेस आइडिया नहीं बताया जाता. अगर सब कुछ बता दिया जाए, तो नुकसान भी हो सकता है. उन्होंने बताया कि फायर पान में ठंडा आइस डाला जाता है, जिसकी वजह से पान से धुआं निकलता है. यही धुआं लोगों को आकर्षित करता है और कई ग्राहक इसे खाने से ज्यादा वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के लिए लेते हैं.
कीमत की बात करें तो फायर पान 50 रुपए में उपलब्ध है, जबकि बिस्किट धुआं वाला पान 30 रुपए में दिया जाता है. बनारसी मीठा पान 20 रुपए का है, वहीं 50 रुपए में तीन पान का ऑफर भी ग्राहकों को काफी पसंद आता है. शैलेन्द्र के अनुसार, रोजाना करीब 7 हजार रुपए की पान की बिक्री हो रही है, जो इस व्यवसाय की सफलता को दर्शाता है.
शैलेन्द्र परिहार के पास बनारसी पान बनाने का करीब 9 साल का लंबा अनुभव है. उन्होंने बताया कि शुरुआत में वे किसी दूसरे के यहां नौकरी करके पान बनाना सीखते थे, जहां उन्हें मात्र 10 हजार रुपए महीने की तनख्वाह मिलती थी. मेहनत, अनुभव और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने अपनी खुद की दुकान शुरू की और आज उनकी आमदनी उस समय से कई गुना ज्यादा हो चुकी है. शैलेन्द्र की कहानी यह साबित करती है कि सही हुनर, धैर्य और मेहनत से छोटा सा व्यवसाय भी बड़ी सफलता में बदला जा सकता है.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.