पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने मंडी गोबिंदगढ़ स्थित देश भगत यूनिवर्सिटी और उसे संचालित करने वाली संस्था को 1.37 करोड़ रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। वर्ष 2013 में परिसर में बाथरूम की दीवार गिरने से एक छात्रा 100 प्रतिशत स्थायी रूप से दिव्यांग हो गई थी। खंडपीठ के जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस विकास सूरी ने यह फैसला बीएससी अंतिम वर्ष की छात्रा संदीप कौर की अपील पर सुनाया। हादसे के समय वह दीवार के पास बैठी थी। अचानक दीवार गिरने से वह मलबे के नीचे दब गई और उसकी रीढ़ की हड्डी में गंभीर फ्रैक्चर हो गया। इसके बाद वह पूरी तरह दिव्यांग हो गई। लंबे समय तक चला इलाज हादसे के बाद छात्रा को पहले मंडी गोबिंदगढ़ के सिविल अस्पताल ले जाया गया। वहां से उसे बेहतर इलाज के लिए चंडीगढ़ के सेक्टर-32 अस्पताल रेफर किया गया। बाद में पंचकूला के एक निजी अस्पताल में भी उसका इलाज चला। रिकॉर्ड के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन ने शुरुआत में इलाज का पूरा खर्च उठाने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में केवल 2.25 लाख रुपये ही दिए गए। इसके बाद पीड़िता ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर एक करोड़ रुपये मुआवजे की मांग की। सुरक्षित माहौल देना संस्थान की जिम्मेदारी अदालत ने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान का कर्तव्य है कि वह छात्रों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराए। यदि परिसर में रखरखाव की कमी से कोई हादसा होता है तो उसकी जिम्मेदारी संस्थान की होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि शिक्षा का अधिकार केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षित माहौल में शिक्षा पाना भी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार का हिस्सा है। मुआवजे की राशि तय करते समय अदालत ने छात्रा की संभावित आय, भविष्य की कमाई में बढ़ोतरी, दो सहायकों का खर्च, इलाज, मानसिक पीड़ा, विवाह की संभावनाओं पर असर और अन्य खर्चों को ध्यान में रखा। इन सभी पहलुओं को जोड़ते हुए अदालत ने कुल 1,37,24,000 रुपये मुआवजा तय किया और इस पर 7.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देने का आदेश दिया। विश्वविद्यालय और संबंधित संस्था को तीन माह के भीतर पूरी राशि अदा करनी होगी।
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