फेडरेशन ऑफ एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स ऑफ पंजाब ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच प्रदेश में एलपीजी (रसोई गैस) सप्लाई को लेकर गंभीर चिंता जताई है। फेडरेशन ने कहा कि जमीनी स्तर पर सप्लाई की स्थिति और सरकारी दावों में बड़ा अंतर है, जिससे लोगों में घबराहट बढ़ रही है। फेडरेशन के प्रेजीडेंट एस गुरपाल सिंह मान ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने की खबरों के बाद ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने घरेलू सिलेंडर पर करीब 260 रुपए और 19 किलो कमर्शियल सिलेंडर पर 115 रुपए तक की बढ़ोतरी कर दी। अचानक बढ़ी कीमतों और स्पष्ट जानकारी की कमी से उपभोक्ताओं में गैस की कमी का डर फैल गया। बुकिंग नियमों से बढ़ी परेशानी फेडरेशन ने बताया कि शहरों में 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन बाद ही गैस बुकिंग की शर्त लगा दी गई है। जबकि आधिकारिक तौर पर कमी से इनकार किया जा रहा है, ऐसे में ये पाबंदियां लोगों को और ज्यादा भ्रमित कर रही हैं। कुछ दिनों के लिए बुकिंग सिस्टम बंद रहने से स्थिति और बिगड़ गई। इससे लंबित बुकिंग बढ़ गई, जबकि बॉटलिंग प्लांट से सप्लाई मांग के मुकाबले कम मिल रही है। फेडरेशन का कहना है कि सरकार और कंपनियां पर्याप्त गैस उपलब्ध होने का दावा कर रही हैं, लेकिन डिस्ट्रीब्यूटर्स के पास सप्लाई कम पहुंच रही है और बैकलॉग लगातार बढ़ रहा है। इससे लोगों का भरोसा कमजोर हो रहा है। अचानक कीमत बढ़ाना, बुकिंग पर पाबंदी लगाना और सिस्टम बंद करना—इन सब कदमों से हालात संभलने के बजाय और खराब हुए हैं। लोगों को कोविड जैसे संकट का डर महसूस होने लगा है। डिस्ट्रीब्यूटर्स को नहीं मिल रही जानकारी डिस्ट्रीब्यूटर्स का कहना है कि उन्हें सप्लाई शेड्यूल और नीतियों की सही समय पर जानकारी नहीं दी जा रही, जिससे वे लोगों के सवालों का जवाब नहीं दे पा रहे। उन्हें फैसलों में शामिल भी नहीं किया जाता, जबकि वही सीधे उपभोक्ताओं से जुड़े होते हैं। फेडरेशन ने कहा कि लोगों की नाराजगी का सामना डिस्ट्रीब्यूटर्स और उनके कर्मचारियों को करना पड़ रहा है, जबकि समस्या उनके नियंत्रण से बाहर है। इससे उनकी सुरक्षा और कामकाज पर असर पड़ रहा है। साथ ही, बढ़ते खर्च और जिम्मेदारियों के बावजूद उनकी कमीशन में वर्षों से कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। नीतियों को लेकर पारदर्शिता लाई जाए फेडरेशन ने सरकार और कंपनियों से मांग की है कि सप्लाई और नीतियों को लेकर पारदर्शिता लाई जाए, बुकिंग नियमों को आसान किया जाए, बॉटलिंग प्लांट पूरी क्षमता से चलाए जाएं और डिस्ट्रीब्यूटर्स की सुरक्षा व आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए तुरंत कदम उठाए जाएं।
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