किसानों का छलका दर्द
किसानों ने बताया कि हमने प्याज की फसल पर पूरी मेहनत और पूंजी लगाई थी। एक एकड़ में करीब एक लाख रुपये खर्च हो जाते हैं, लेकिन इस बार प्याज के भाव इतने गिर गए हैं कि लागत भी नहीं निकल पा रही है। मजबूर होकर कई किसान फसल पर ट्रैक्टर चला रहे है। वहीं, सारोला के किसान उमेश का कहना नही कि पिछले साल जब प्याज के दाम 30 रुपये किलो थे, तब घरों में खुशहाली आई थी। इस बार एक रुपये किलो के भाव से सिर्फ नुकसान ही हो रहा है। हमने प्याज की अच्छी फसल होने पर कई सपने देखे थे, लेकिन सब अधूरे रह गए।
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सस्ते दाम में बिक रहा प्याज
किसानों की मानें तो बरसाती मौसम की यह प्याज गुणवत्ता में बेहतरीन मानी जाती है और मंडियों में भी इसकी अच्छी मांग रहती है। मगर इस बार कीमतों में गिरावट ने किसानों को गहरा झटका दिया है। एक ओर किसान नुकसान से जूझ रहे हैं। वहीं आम उपभोक्ताओं के लिए यह राहत भरा समय है। इस बार सब्जी मंडियों में अच्छी क्वालिटी की प्याज खेरची में महज पांच रुपये किलो में मिल रही है। आम आदमी की रसोई में प्याज सस्ती हो गई है, लेकिन किसान के आंसुओं की कीमत अब तक किसी ने नहीं पूछी। कुल मिलाकर रसोई की शान प्याज अब किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है। किसान उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार जल्द उनकी समस्या पर ध्यान देगी। वरना आने वाले सीजन में खेतों में प्याज की जगह निराशा की फसल उग सकती है।
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