Potato Growing Tips: सरगुजा संभाग में आलू की फसल पर कीट और रोगों का प्रकोप किसानों के लिए बड़ी परेशानी बनता जा रहा है. कंद वर्गीय फसल होने के कारण आलू में मिट्टी जनित बीमारियों का खतरा ज्यादा रहता है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि फसल परिवर्तन, बीज उपचार और मिट्टी उपचार से नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है. पत्तों का मुरझाना बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है, जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है. सही तकनीक और वैज्ञानिक उपाय अपनाकर किसान बेहतर उत्पादन और मुनाफा कमा सकते हैं.
क्यों ज्यादा संवेदनशील है आलू की फसल
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक आलू एक कंद वर्गीय फसल है, जो जमीन के नीचे विकसित होती है. इसी वजह से इसकी अधिकतर बीमारियां मिट्टी से फैलती हैं. अगर एक ही खेत में बार-बार आलू की खेती की जाए, तो मिट्टी में मौजूद रोगाणु और कीट सक्रिय हो जाते हैं. इसका सीधा असर पौधों की जड़ों पर पड़ता है और धीरे-धीरे पूरा पौधा कमजोर होकर मुरझाने लगता है.
फसल परिवर्तन सबसे पहला और जरूरी नियम
कृषि विशेषज्ञ गंगा राम बताते हैं कि आलू की खेती में सबसे जरूरी है फसल परिवर्तन. जिस खेत में पहले कंद वर्गीय फसल ली गई हो, वहां दोबारा आलू लगाने से बचना चाहिए. ऐसे खेतों में लतावर्गीय या दूसरी फसलें लगाकर मिट्टी को रोग मुक्त किया जा सकता है.
बीज का सही चुनाव और उपचार क्यों जरूरी
गंगा राम के अनुसार आलू का बीज 20 से 25 ग्राम वजन का होना चाहिए. बिना उपचार किए बीज बोने से मिट्टी में मौजूद फफूंद और विषाणु सीधे बीज पर हमला कर देते हैं. इसका असर तब दिखता है, जब पौधा कंद बनने की अवस्था में पहुंचकर अचानक मुरझाने लगता है और सूख जाता है.
मिट्टी उपचार और सिंचाई से बच सकता है नुकसान
आलू की खेती से पहले खेत की अच्छी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बनाना जरूरी है. बीज उपचार और मिट्टी उपचार से रोग का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है. विशेषज्ञ ड्रिप सिंचाई को भी बेहद फायदेमंद मानते हैं, क्योंकि इससे नमी संतुलित रहती है और पौधों की बढ़वार बेहतर होती है.
पत्ते मुरझाएं तो तुरंत सतर्क हो जाएं
अगर आलू की फसल में पत्ते मुरझाने लगें, तो इसे हल्के में न लें. यह बीमारी का शुरुआती संकेत हो सकता है. फफूंद जनित रोगों की रोकथाम के लिए कार्बेन्डाजिम या बाविस्टिन का छिड़काव किया जा सकता है. एक लीटर पानी में ढाई ग्राम दवा मिलाकर एक-दो बार छिड़काव करने से रोग पर नियंत्रण पाया जा सकता है.
सिर्फ देसी उपाय काफी नहीं
गंगा राम साफ कहते हैं कि चूंकि यह बीमारी मिट्टी से जुड़ी होती है, इसलिए केवल घरेलू उपाय पूरी तरह कारगर नहीं होते. सबसे बेहतर तरीका यही है कि खेती शुरू करने से पहले ही बीज और मिट्टी का वैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जाए.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें
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