सुखना को रामसर साइट्स का टैग दिलाने की शुरुआत हो चुकी है। प्रशासन ने सुखना का रामसर साइट में शामिल करने के लिए प्रस्ताव बनाकर मंजूरी केलिए पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेज दिया है।
इसके साथ ही सुखना वेटलैंड का इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट प्लान भी भेजा गया है। यह इंटीग्रेटेड प्लान पांच साल के लिए बनाकर भेजा है, इसमें सुखना के जीर्णोधार से लेकर डीसिल्टिंग से लेकर झील पर पर्यटकों के लिए नई सुविधाएं और गतिविधियों को शुरू करने का प्लान बनाया गया है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद सुखना को रामसर साइट में शामिल करने का प्रस्ताव ईरान में रामसर कन्वेंशन के सचिवालय के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। बता दें सुखना झील करीब 565 एकड़ क्षेत्र में फैली हुई है। कैचमेंट एरिया लगभग 10,395 एकड़ में है। वर्ष 1988 में इसे राष्ट्रीय वेटलैंड घोषित किया गया था।
सुखना का रामसर साइट का दर्जा मिलने से लेक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। सुखना के संरक्षण के लिए इस प्लान के तहत खास ध्यान दिया जाएगा और इसे पर्यावरण के नजरिए से एक महत्वपूर्ण वेटलैंड माना जाएगा। रामसर साइट का दर्जा मिलने से यहां दुनिया भर से आने वाले पर्यटक, पक्षी प्रेमी और शोधकर्ता का के लिए अहम प्वॉइंट बनेगा।रामसर साइट्स में शामिल साइट्स के संरक्षण से जल-शोधन, बाढ़-नियंत्रण, जलवायु-संतुलन, जीव-जंतुओं की सुरक्षा और मानवीय आजीविका को मदद मिलती है। बता दें कि भारत में रामसर साइट्स की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2025 तक 89 स्थल सूचीबद्ध हैं, जो दक्षिण एशिया में सबसे अधिक है।
सुखना के जीर्णोद्धार के लिए मिलेंगे 22.50 करोड़ रुपये
मंत्रालय से मंजूरी और रामसर साइट घोषित होने से अगले पांच साल के लिए प्रशासन को सुखना के जीर्णोधार के लिए 22.50 करोड़ रुपये फंड मिलेगा। प्रशासन के वन विभाग ने सुखना के संरक्षण और प्रबंधन के लिए 5 साल का एक्शन प्लान तैयार किया है, जोकि मंत्रालय को भेजा गया है। इस एक्शन प्लान में सुखना की सफाई, प्रदूषण रोकने, पानी की गुणवत्ता सुधारने, पक्षियों और जीव-जंतुओं के संरक्षण जैसे काम शामिल होंगे। पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड मैनेजमेंट प्लान में सुखना में जल क्षमता बढ़ाने के लिए दो विकल्प रखे गए हैं। पहला पानी का लेवल बरकरार रखते हुए गाद हटाना और दूसरा सुखना की हाइट बढ़ाना है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर सुखना के बांध की ऊंचाई बढ़ाई जाती है तो इसकी क्षमता करीब 20 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।
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