Guldaudi Plant Care In Winter: गुलदाउदी के पौधों को रोगों और कीटों से कैसे बचाया जाए, इस बारे में बोकारो की डॉ. रूपा ने विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस पौधे में कौन-कौन से रोग लगते हैं और उनके उपचार के लिए कौन सी दवा किस मात्रा में डालनी चाहिए.
गुलदाउदी हमारे बागानों के सबसे खूबसूरत और आकर्षक फूलों में से एक है. इसकी सुंदरता के कारण बागवानी के शौकीन लोगों के साथ-साथ फूलों की खेती करने वाले किसान भी इसकी ओर खासा रुझान रखते हैं. हालांकि कई बार गुलदाउदी के पौधों में विभिन्न रोगों और कीटों का प्रकोप देखने को मिलता है, जिससे न केवल उत्पादन प्रभावित होता है बल्कि फूलों की खूबसूरती भी कम हो जाती है. ऐसे में बोकारो जिले के कृषि विज्ञान केंद्र की कृषि वैज्ञानिक डॉ. रूपा ने गुलदाउदी के पौधों में लगने वाले रोगों और कीटों के प्रभावी प्रबंधन को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी है.

पत्ती धब्बा रोग गुलदाउदी के पौधों की सुंदरता और शोभा को गंभीर रूप से प्रभावित करता है. इस रोग के कारण पत्तियों पर भूरे रंग के धब्बे दिखाई देने लगते हैं, जिससे पत्तियां धीरे-धीरे सूखकर गिर जाती है इसका सीधा असर पौधे की खूबसूरती पर देखने को मिलता है. ऐसे में इस रोग के प्रभावी नियंत्रण के लिए बाविस्टिन दवा का 0.1 प्रतिशत घोल बनाकर 10 दिन के अंतराल पर छिड़काव करने से पौधे सुरक्षित रहते हैं और रोग का प्रकोप कम हो जाता है.

दीमक एक गंभीर कीट है, जिसका आक्रमण कम सिंचाई वाले क्षेत्रों में अधिक देखने को मिलता है. यह कीट पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचाता है और कभी-कभी तनों को भी प्रभावित करता है और दीमक के अधिक प्रकोप की स्थिति में पौधे छोटे रह जाते हैं, मुरझाकर सूख जाते हैं. ऐसे में दीमक से बचाव के लिए, पौधों के चारों ओर नियमित निकाई-गुड़ाई करें और सही सिंचाई के माध्यम से दीमक को नियंत्रित किया जा सकता है. इसके अलावा रोपाई से पहले करंज की खली और लिनडेन धूल का 10 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से प्रयोग किया जा सकता है. इसके अलावा अधिक प्रकोप पड़ने पर क्लोरपाइरीफॉस ट्रॉल दवा की 2.5 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी में घोलकर पौधों के आसपास सिंचाई करने से दीमक की समस्या से निजात मिलती है.
Add News18 as
Preferred Source on Google

गुलदाउदी पोंधे में रस चूसने वाले कीट पत्तियों और फूलों के कोमल भागों का रस चूसते हैं, जिस कारण पौधे का विकास रुक जाता है और पत्तियां सिकुड़ जाती हैं. ऐसे पौधा खराब और बेढंगा दिखने लगता है. ऐसे में इसकी रोकथाम के लिए मैलाथियान दवा की 1 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने से रस चूसने वाले कीट की समस्या कम हो जाती है.

गुलदाउदी के फूलों में थ्रिप्स का प्रकोप एक गंभीर समस्या है.यह कीट पौधों की पत्तियों और कलियों का रस चूसकर नुकसान पहुंचाता है, जिससे पत्तियां भूरी हो जाती हैं और पौधे टेढ़े-मेढ़े व विकृत दिखाई देने लगते हैं थ्रिप्स के नियंत्रण के लिए डायमेथोयट या मिथाइल डिमेटोन अथवा कार्टेप हाइड्रोक्लोराइड (1.0 ग्राम प्रति लीटर पानी) का घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी जाती है ,बेहतर नियंत्रण के लिए 10–15 दिन के अंतराल पर दो से तीन बार छिड़काव करना लाभदायक होता है.

पाउडरी मिल्ड्यू एक फफूंद जनित रोग है, जिसमें गुलदाउदी की पत्तियों और टहनियों पर सफेद रंग की परत या धब्बे दिखाई देने लगते हैं. इससे पौधों की वृद्धि रुक जाती है और फूलों की गुणवत्ता प्रभावित होती है. इसके नियंत्रण के लिए केराथेन दवा की 1 मिलीलीटर मात्रा को एक लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने से पौधों को सुरक्षित रखा जा सकता है.

यह तना छेदक कीट गुलदाउदी के तने और पत्तियों पर भी गंभीर असर डालता है. यह कीट पिल्लू तने और पत्तियों को कुतरते हैं, जिससे पौधे की बढ़वार रुक जाती है, पत्तियां मुरझाने लगती हैं और तना कमजोर हो जाता है, जिसके कारण फूलों की संख्या और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होती हैं. ऐसे में इसकी रोकथाम के लिए स्पिनोसैड 0.3 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करने से तना छेदक कीट से पौधे को सुरक्षित रख सकते हैं.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.