राजघाट स्थित ऐतिहासिक मालवीय पुल पर मरम्मत कार्य को लेकर 23 दिसंबर की रात 10 बजे से वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित कर दिया गया। पुल बंद होने के बाद 24 दिसंबर की सुबह आमजन की परेशानी साफ नजर आई। वैकल्पिक व्यवस्था न होने के कारण बड़ी संख्या में लोग पैदल ही पुल पार करते दिखाई दिए, जिससे खासकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
सुबह दफ्तर, स्कूल और रोजमर्रा के कामों के लिए निकले लोग पुल के दोनों ओर फंसे रहे। मजबूरी में लोगों ने ठंड और कोहरे के बीच लंबी दूरी पैदल तय की। कई महिलाएं बच्चों को गोद में लेकर पुल पार करती दिखीं, जबकि बुजुर्गों को बीच-बीच में रुककर आराम करना पड़ा।
पुल पार कर रहीं महिलाओं ने प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि मरम्मत कार्य जरूरी है, लेकिन बिना वैकल्पिक इंतजाम किए पुल बंद करना आम लोगों के साथ अन्याय है। महिलाओं ने मांग की कि पुल बंद करने से पहले नाव या अन्य सुरक्षित साधन की व्यवस्था होनी चाहिए थी, जिससे लोगों को उस पार जाने में सहूलियत मिलती। स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा कठिनाई हुई। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रही, वहीं बुजुर्गों के लिए पैदल चलना जोखिम भरा साबित हुआ।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मालवीय पुल वाराणसी के प्रमुख संपर्क मार्गों में से एक है। ऐसे में पुल बंद होने से पहले यात्रियों के लिए समुचित वैकल्पिक व्यवस्था और स्पष्ट सूचना दी जानी चाहिए थी। फिलहाल पुल बंद रहने से राजघाट क्षेत्र समेत आसपास के इलाकों में आवागमन प्रभावित है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि मरम्मत अवधि के दौरान नाव सेवा या अन्य अस्थायी व्यवस्था जल्द शुरू की जाए, ताकि आमजन को राहत मिल सके।
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