रिपोर्ट- सुबीर चौधरी. छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही से एक अलग तस्वीर सामने आई है. यहां लोगों ने किसी देवी-देवता की नहीं बल्कि बिजली के खंभे की पूजा की है. मामला सकोला तहसील के अंधियार-पारा गांव का है. नाम के अनुरूप ही यह गांव पिछले चार महीनों से अंधेरे में डूबा था. न्यूज 18 छत्तीसगढ़ ने जब इस खबर को प्रमुखता से दिखाया, तो प्रशासन जागा और आज चार महीने बाद वहां बिजली पहुंची. तस्वीर में नजारा किसी मंदिर का नहीं बल्कि केसला गांव के उस बिजली खंभे का है, जिसका ग्रामीण बेसब्री से इंतजार कर रहे थे. पिछले 4 महीनों से यहां के लोग चिमनी और मोमबत्ती के भरोसे रात गुजार रहे थे. बारिश की वजह से खंभे गिर गए थे और बिजली गुल हो गई थी. आज जैसे ही बल्ब जला, तो ग्रामीणों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. महिलाओं ने थाली सजाकर बिजली के खंभे का तिलक-चंदन किया, आरती उतारी और शंखनाद कर उजाले का स्वागत किया. मानो उनके गांव में आज दीवाली मनाई जा रही हो. अंधियार-पारा के लोगों के लिए यह बिजली सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि सुरक्षा और सुकून है. प्रशासन की सुस्ती ने इन्हें महीनों अंधेरे में रखा लेकिन मीडिया की सक्रियता और ग्रामीणों के सब्र ने आज इस अंधेरे को मात दे दी है. अब सकोला का यह अंधियार-पारा वाकई में उजियार-पारा बन गया है.
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