बिहार सरकार के उद्योग विभाग द्वारा मिथिला पेंटिंग सहित 18 पारंपरिक हस्तशिल्प विधाओं में निःशुल्क ट्रेनिंग दी जाएगी. पटना के उपेंद्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान में जनवरी से जून 2026 तक चलने वाले छमाही सत्र के लिए 400 सीटों पर एडमिशन शुरू हो गया है. इच्छुक अभ्यर्थी 20 दिसंबर तक आधिकारिक वेबसाइट www.umsas.org.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं.
अगर आप भी मिथिला पेंटिंग से लेकर पेपर मैशी तक, बिहार के पारंपरिक हस्तशिल्प विधाओं के मास्टर बनना चाहते हैं तो अब आपको इधर उधर भटकने की जरूरत नहीं है. उद्योग विभाग के अंतर्गत बिहार सरकार आपको फ्री में ट्रेनिंग देगी. इसके लिए पटना के उपेंद्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान में जनवरी से जून 2026 तक चलने वाले छमाही सत्र के लिए एडमिशन प्रक्रिया शुरू हो गई है.

मधुबनी पेंटिंग, टिकुली आर्ट सहित कुल 18 पारंपरिक कलाओं में 400 सीटों पर निःशुल्क ट्रेनिंग की घोषणा संस्थान ने की है. यह संस्थान राजधानी पटना के पाटलिपुत्र इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित है. वर्षों ने राज्य के कला को संरक्षित करने का जिम्मा उठाती है साथ ही युवाओं को सिखा कर उन्हें रोजगार से जोड़ती है.

आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी. इच्छुक अभ्यर्थी संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट www.umsas.org.in पर जाकर अपना आवेदन जमा कर सकेंगे. आवेदन की अंतिम तिथि 20 दिसंबर रात 11:59 बजे निर्धारित की गई है. संस्थान ने अभ्यर्थियों को समय पर आवेदन पूरा करने की सलाह दी है, ताकि किसी तकनीकी गलती से वे अवसर न चूकें.
Add News18 as
Preferred Source on Google

चयन प्रक्रिया के तहत पहले अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की गहन जांच की जाएगी. दस्तावेज सही पाए जाने पर उम्मीदवारों को व्यवहारिक परीक्षा और इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा. अंतिम चयन केवल उन्हीं अभ्यर्थियों का होगा, जो दोनों चरणों में सफल प्रदर्शन करेंगे. यानी प्रशिक्षण पाने के लिए कौशल और तैयारी दोनों आवश्यक होंगे.

संस्थान ने ट्रेनर के लिए भी आवेदन आमंत्रित किए हैं. आवेदनकर्ता के पास सरकारी योजनाओं के तहत ट्रेनिंग कार्य का प्रमाणित अनुभव होना चाहिए, साथ ही आयु सीमा 30 से 60 वर्ष तय की गई है. संबंधित कला का वैध आर्टिजन कार्ड भी अनिवार्य है.

मानदेय के रूप में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त ट्रेनर को 50 हजार रुपए, राज्य पुरस्कार प्राप्त ट्रेनर को 30 हजार रुपए, MFA/BFA डिग्रीधारकों को 25 हजार रुपए और अन्य श्रेणी वालों को 20 हजार रुपए प्रतिमाह दिए जाएंगे.

उपेंद्र महारथी शिल्प अनुसंधान संस्थान (UMSAS) बिहार सरकार के उद्योग विभाग के अधीन एक प्रमुख शिल्प विकास संस्थान है. इसका उद्देश्य राज्य की पारंपरिक एवं लोक कलाओं का संरक्षण और आधुनिक बाजार से जोड़ना है. इस संस्थान का नाम प्रसिद्ध कलाकार, डिज़ाइनर और कला-प्रवर्तक उपेंद्र महारथी के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने बिहार की कला और संस्कृति को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया. मिथिला पेंटिंग जैसी कई कलाओं को इंटरनेशनल बाजार तक पहुंचाने में इस संस्थान का अहम रोल रहा.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.