Unique Wedding Card: शादी के सीजन में एक अनोखे निमंत्रण पत्र ने रिश्तेदारों को चक्कर में डाल दिया है. बेटी की शादी के लिए छपवाया गया यह रहस्यमयी कार्ड सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है. इसकी भाषा और डिजाइन इतनी जटिल है कि मेहमान इसे समझने के लिए एक्सपर्ट्स के चक्कर काट रहे हैं.
शादियों का सीजन जोर पकड़ने लगा है. शादी वाले घरों में शहनाइयों की तैयारी शुरू हो चुकी है. रिश्तेदारों तक निमंत्रण कार्ड पहुंचने लगे हैं. जैसे ही किसी के हाथ में कार्ड आता है, सबसे पहले उसकी डिजाइन, भाषा और अंदाज पर नजर जाती है. आज के दौर में शादी का कार्ड सिर्फ जानकारी देने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह परिवार की सोच, परंपरा और क्रिएटिविटी का भी प्रतीक बन गया है. इसी वजह से लोग कार्ड को खास बनाने पर खास ध्यान दे रहे हैं.

इसी कड़ी में एक ऐसा शादी का कार्ड सामने आया है, जो सबका ध्यान खींच रहा है. यह कार्ड पढ़ना हर किसी के बस की बात नहीं, बल्कि इसे समझने के लिए लोग एक्सपर्ट की मदद ले रहे हैं. इसकी अनोखी भाषा और अंदाज इसे बेहद खास बना रही है. यही वजह है कि यह कार्ड चर्चा का विषय बना हुआ है.

दरअसल, इस शादी के कार्ड को पूरी तरह संस्कृत भाषा में छपवाया गया है. आमतौर पर शादी के कार्ड में सरल और रोजमर्रा की भाषा का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि हर कोई आसानी से समझ सके. लेकिन इस कार्ड में इसके उलट संस्कृत के कठिन और भारी-भरकम शब्दों का प्रयोग किया गया है. यही इसे बेहद खास बनाता है.
Add News18 as
Preferred Source on Google

कार्ड में दूल्हे का नाम, विवाह की तिथि, स्थान और सभी वैवाहिक कार्यक्रम शुद्ध संस्कृत में लिखे गए हैं. यहां तक कि छोटे-छोटे वाक्य भी ऐसे शब्दों से सजाए गए हैं, जिन्हें समझने के लिए संस्कृत का अच्छा ज्ञान होना जरूरी है. यही वजह है कि यह कार्ड सामान्य कार्डों से बिल्कुल अलग नजर आता है. लोग इसे देखकर हैरानी भी जता रहे हैं. साथ ही इसके पीछे की सोच की सराहना भी कर रहे हैं. अपनी भाषा और परंपरा को जीवित रखने का यह तरीका हर तरफ वाहवाही लूट रहा है.

यह कार्ड लड़की वालों ने छपवाई है. दुल्हन का नाम वैष्णवी है जबकि दूल्हे का नाम शशांक शेखर है. पटना निवासी विभा पांडे और ब्रजेश चंद्र पांडे की बेटी की शादी है. 11 मार्च को बारात आयेगी. कार्ड की भाषा पर जाएं तो 07 मार्च को फलदानाम् और तिलकोत्सवश्च है. 09 मार्च को मण्डपाच्छादन, हरिद्रावन्दनादिकम् है. 11 मार्च को घृतधारादिकम्, स्द्रदत्त शिवमस्य उपनयनम् सायं अष्टवादने वरयात्रिक-स्वागत् प्रीतिभोजः, शुभ विवाहः है. कार्ड के एक हिस्से में लिखा हुआ है,”कन्या ब्रजेश चन्द्रस्य वैष्णवी सुलक्ष्णा. शशाक शेखर प्राप्य सौभाग्य प्राप्नुयात् सदा. गायत्री च विश्वी पटवल्लक्ष्मी देवपती यया। उमा यया महेशाने तथा कन्याऽस्तु.”

इसके अलावा भी और कई ऐसे शब्द है जैसे बढ़ना आम लोगों के क्षमता के बाहर है. जैसे, “एतयोः सम्पत्स्यमाने सुमङ्गल परिणयोत्सवे तथा चि० रुद्रदत्त शिवमस्योपनयने आशीर्वाद प्रदानाय भवन्तः”. कार्ड का डिजाइन भी काफी पारंपरिक रखा गया है. इस कार्ड को संस्कृत भाषा में छपवाने का कारण अपनी विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की भावना को उजागर करता है. लड़की के पिता ब्रजेश चंद्र पांडे ने लोकल 18 को बताया कि इस शादी में प्रयाग किया गया संस्कृत का शब्द उनके पिता द्वारा लिखें गए हैं. उन्होंने 2004 में अपनी पोती के लिए इन्हीं शब्दों का प्रयोग किया था. संस्कृत के वही शब्द और वाक्यों का प्रयोग इस कार्ड में किया गया है. यह दर्शाता है कि यह परिवार अपनी जड़ों, संस्कारों और भारतीय संस्कृति को बेहद महत्व देता है.

आपको बता दें कि कार्ड में लिखे गए शब्द लड़की के दादा कैलाश पांडेय द्वारा लिखी गई है. इन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की थी. इसके बाद हजारीबाग जिला स्कूल में उनकी पहली नौकरी हुई. बाद में फिर घर संभालने के लिए नालंदा स्थित तेल्हारा पहुंचे. यहां जब संस्कृत उच्च विद्यालय की स्थापना हुई तो शुरुआत से सेवानिवृत्ति तक वो प्रधानाचार्य की भूमिका में पदस्थापित रहे. उन्हें 5 सितंबर 1983 को तत्कालीन सीएम के हाथों राजकीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. वो व्याकरणाचार्य और साहित्याचार्य थे. कर्मकांड के जानकार थे. 106 साल की उम्र में वो बैकुंठ धाम पधारे.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.