Rajya Sabha Chunav Bihar NDA Rift : बिहार के राज्यसभा चुनाव में इस बार मुकाबला केवल नंबर गेम का नहीं, बल्कि गठबंधन की केमिस्ट्री का भी है. पांचवीं सीट पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की उम्मीदवारी सामने आने के बाद एनडीए के भीतर खींचतान बढ़ती दिख रही है. खासकर तब, जब लोक जनशक्ति पार्टी रामविलास के प्रमुख चिराग पासवान ने इस उम्मीदवारी को लेकर अनभिज्ञता जताई है. सवाल उठ रहा है कि क्या इसके पीछे कोई गहरा राजनीतिक संकेत छिपा है?
बिहार राज्यसभा चुनाव: बीजेपी उम्मीदवारों को बधाई, पर उपेंद्र कुशवाहा पर चिराग पासवान ने साधी दूरी
19 विधायकों की भूमिका पर जोर
बता दें कि बिहार विधानसभा में एलजेपी रामविलास के 19 विधायक हैं. ऐसे में राज्यसभा चुनाव के नंबर गेम में उनकी भूमिका अहम मानी जा रही है. चिराग पासवान ने साफ कहा कि हमारे 19 विधायकों की भूमिका रहने वाली है. जितने राज्यों में बीजेपी की सूची आई है, उन सभी उम्मीदवारों को वे बधाई देते हैं. चिराग ने कहा कि हर कदम पर उनका साथ रहेगा. उन्होंने यह भी बताया कि शिवेश राम से बातचीत कर उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे परिवार की तरह हैं और पूरा समर्थन देंगे. लेकिन, सवाल तो उपेंद्र कुशवाहा की उम्मीदवारी को लेकर उनकी अनभिज्ञता जाहिर करने को लेकर है.
उपेंद्र कुशवाहा पर चिराग की दूरी क्यों?
पांचवीं सीट पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा की उम्मीदवारी की चर्चा है. राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने इसके लिए आधिकारिक पत्र भी जारी कर दिया है. लेकिन, इस सवाल पर चिराग पासवान ने कहा कि उनकी उम्मीदवारी की अधिकृत जानकारी उनके पास नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि गठबंधन में इस पर कोई चर्चा नहीं हुई है. इसलिए यह बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि एनडीए की पांचवीं सीट पर जीत के लिए अतिरिक्त वोटों की जरूरत है. ऐसे में सहयोगी दलों की एकजुटता जरूरी है. चिराग का यह कहना कि उन्हें जानकारी नहीं है, राजनीतिक संकेत माना जा रहा है.
अरुण भारती ने भी दोहराई वही बात
जमुई सांसद अरुण भारती ने भी लगभग वही रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि फिलहाल दो अधिकृत उम्मीदवारों के बारे में जानकारी है. बाकी नाम सामने आएंगे तो वे अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान से मार्गदर्शन लेंगे. उपेंद्र कुशवाहा के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है. जब जानकारी आएगी तब पार्टी स्तर पर निर्णय लिया जाएगा. हैरत में डालने वाली बात यह है कि चिराग पासवान तब इस बात से अनभिज्ञता जाहिर कर रहे हैं जब उपेंद्र कुशवाहा दो दिन पहले ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मिलकर आए हैं, और उसके बाद उनकी पार्टी ने राज्यसभा की उम्मीदवारी घोषित की है.
एनडीए में अंदरूनी समीकरण?
राजनीति के जानकारों की नजर में यह सब एनडीए की अंदरुनी राजनीति से भी जुड़ी हुई है. दरअसल, चिराग पासवान की पार्टी के पास 19 सीटें हैं, जबकि उपेंद्र कुशवाहा की रालोमो के खाते में महज 4 सीटें हैं. राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों का समर्थन जरूरी है. एनडीए के पास कुल 202 विधायक हैं, जिनमें भाजपा के पास 89 तो जदयू के खाते में 85 सीटें हैं. हम के खाते में 5 सीटें हैं. ऐसे में राज्यसभा की चार सीटों पर एनडीए की जीत आसान मानी जा रही है, लेकिन पांचवीं सीट पर समीकरण थोड़ा जटिल है. ऐसे में एलजेपी रामविलास जैसे सहयोगी दलों का रुख महत्वपूर्ण हो जाता है. चिराग पासवान का कुशवाहा की उम्मीदवारी पर सीधे समर्थन न देना कई तरह के संकेत देता है.
चिराग के बयान से एनडीए में हलचल
सवाल यह है कि क्या यह केवल औपचारिक बयान है या फिर गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर असहजता है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा. फिलहाल बीजेपी के उम्मीदवारों को लेकर स्थिति स्पष्ट है, लेकिन जेडीयू और पांचवीं सीट को लेकर औपचारिक घोषणा का इंतजार है. एनडीए दावा कर रहा है कि सभी पांच सीटें जीतेगा. मगर सहयोगी दलों के बयानों ने सस्पेंस बढ़ा दिया है. अब नजर इस बात पर है कि क्या चिराग पासवान खुलकर उपेंद्र कुशवाहा के समर्थन में सामने आते हैं या यह दूरी किसी बड़े राजनीतिक संदेश की ओर इशारा है. राज्यसभा चुनाव ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है.
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