इस पोस्ट के सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर पटना की सड़कों तक बहस शुरू हो गई. लोकल 18 ने जब पटना में आम लोगों से इस मुद्दे पर बातचीत की, तो लोगों की राय बंटी हुई नजर आई. कुछ लोगों का कहना है कि 25 हजार रुपये का चश्मा कोई बहुत बड़ा मुद्दा नहीं है. उनके मुताबिक तेजस्वी यादव एक बड़े राजनीतिक परिवार से आते हैं, ऐसे में महंगा चश्मा पहनना कोई बड़ी बात नहीं है. वहीं दूसरी ओर, कई लोगों ने इस पर कड़ा सवाल उठाया. उनका कहना है कि तेजस्वी यादव खुद को गरीबों और पिछड़ों का नेता बताते हैं, लेकिन महंगे चश्मे पहनना और विदेश यात्राएं करना उनकी छवि से मेल नहीं खाता. कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि जब तेजस्वी यादव किसी नौकरी में नहीं हैं, तो इतनी महंगी चीजों और यात्राओं के लिए पैसा आखिर आता कहां से है.
गरीबों पर चल रहा बुलडोजर, विपक्ष के नेता विदेश यात्रा पर
पटना के सियासी गलियारे के रूप में पहचाने जाने वाले वीरचंद पटेल पथ पर चाय की चुस्की लेते हुए आजाद दूरदर्शी ने इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि बीजेपी द्वारा इस्तेमाल किया गया जुमला ‘बाप नंबरी, बेटा दस नंबरी’ बिल्कुल सही बैठता है. उनके मुताबिक, तेजस्वी यादव को फिलहाल बिहार से कोई मतलब नहीं दिखता.
आजाद दूरदर्शी ने कहा कि चुनाव से महज चार से पांच महीने पहले ही तेजस्वी यादव अचानक सक्रिय हो जाते हैं और हर जगह यह कहते फिरते हैं कि वे गरीबों के नेता हैं और गरीबों की आवाज बनेंगे. लेकिन आज जब बिहार में गरीबों के घरों पर बुलडोजर चल रहा है, चाहे वह कार्रवाई जायज हो या नाजायज, उस वक्त तेजस्वी यादव की आवाज सबसे आगे होनी चाहिए थी. इसके उलट, वह इस समय विदेश यात्रा पर हैं और महंगा चश्मा पहनकर छुट्टियां मना रहे हैं.
महंगा चश्मा पहनने वाला आदमी गरीबों का नेता कैसे
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जो व्यक्ति 25 हजार रुपये का चश्मा पहनकर विदेश घूमता है, वह खुद को बिहार के गरीबों से कैसे जोड़ सकता है. आज़ाद दूरदर्शी का कहना था कि तेजस्वी यादव के पास आखिर ऐसी कौन-सी काबिलियत है जिससे इतना पैसा आ रहा है. उन्होंने आगे कहा कि आज बिहार में सरकारी नौकरी करने वाला व्यक्ति भी शायद ही 25 हजार रुपये का चश्मा खरीद पाए, लेकिन तेजस्वी यादव इतने महंगे शौक किस हैसियत से पूरा कर रहे हैं. यही सवाल आज आम लोगों के मन में है.
यही उम्र है घूमने फिरने की
नरेंद्र भूषण ने इस पूरे मामले को नॉन पॉलिटिकल बताते हुए कहा कि इसमें राजनीति की कोई बात नहीं है. उनके मुताबिक, तेजस्वी यादव एक युवा नेता हैं, इसका यह मतलब नहीं कि उनका निजी जीवन पूरी तरह खत्म हो गया है. उन्होंने कहा कि अगर तेजस्वी यादव 25 हजार रुपये का चश्मा पहनते हैं या विदेश यात्रा पर जाते हैं, तो इसमें आखिर दिक्कत क्या है. क्या लोग यह चाहते हैं कि वह कंबल ओढ़कर घर में ही बैठे रहें?
नरेंद्र भूषण ने आगे कहा कि यही उम्र घूमने-फिरने की होती है, इसमें राजनीति को घसीटना ठीक नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि 25 हजार रुपये का चश्मा तो पटना में भी लोग पहनकर घूमते हैं, फिर तेजस्वी यादव ने पहन लिया तो इसमें गलत क्या है. उनका कहना था कि तेजस्वी यादव दो-दो मुख्यमंत्रियों के बेटे हैं और एक बड़ी राजनीतिक पार्टी के प्रमुख नेता हैं. ऐसे में अगर वह 25 हजार रुपये का चश्मा पहनते हैं, तो यह कोई बड़ी बात नहीं है. जहां तक पैसे लूटने जैसे आरोपों की बात है, उस पर अदालत अपना फैसला दे ही रही है. लेकिन किसी के निजी जीवन पर इस तरह की टिप्पणी करना पूरी तरह गलत है. नरेंद्र भूषण ने यह भी कहा कि चुनाव में हार के बाद थोड़ा मूड फ्रेश करने के लिए बाहर जाना कोई अपराध नहीं है. जब वे वापस आएंगे तो राजनीति भी होगी. फिलहाल, परिवार को समय देना भी उतना ही जरूरी है.
शौक बड़ी चीज होती है, पैसा मायने नहीं रखता
विजय कुमार ने कहा कि हर व्यक्ति का अपना निजी जीवन होता है और उसके अपने शौक भी होते हैं. अगर किसी को 25 हजार रुपये का चश्मा पहनने का शौक है, तो इसमें कोई गलत बात नहीं है. उन्होंने कहा कि यह कोई सबूत नहीं है कि तेजस्वी यादव ने गलत तरीके से कमाए पैसे से चश्मा खरीद है. विजय कुमार का कहना था कि जिसकी जैसी हैसियत होती है, वह उसी के अनुसार खर्च करता है. शौक की कोई तय कीमत नहीं होती. उनका मन करेगा तो वे इससे भी ज्यादा महंगा चश्मा पहन सकते हैं, इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए.
जनता से दूरी सही नहीं
हालांकि, उन्होंने यह भी चेताया कि जनता से लंबे समय तक दूरी बनाए रखना तेजस्वी यादव के लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदायक साबित हो सकता है. उनका कहना था कि अगर कोई नेता लगातार जनता से जुड़ा नहीं रहता, तो धीरे-धीरे संबंध कमजोर होने लगते हैं. केवल सोशल मीडिया के सहारे राजनीति नहीं चल सकती, इसके लिए जमीन पर उतरकर लोगों से सीधा संवाद बनाए रखना बेहद जरूरी है. उन्होंने लालू प्रसाद यादव का उदाहरण देते हुए कहा कि उनका दरवाजा हमेशा आम लोगों के लिए खुला रहता था. उसी तरह तेजस्वी यादव को भी जनता के लिए हमेशा उपस्थित रहना होगा. तभी वे जनता के बीच अपनी पकड़ बना पाएंगे और भविष्य में बिहार के नेतृत्व की भूमिका निभा सकेंगे.
25000 का चश्मा कोई बड़ी बात नहीं
धीरेंद्र कुमार ने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है कि किसी नेता के पहनावे या शौक पर सवाल खड़े किए जाएं. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 2014 में बीजेपी नेताओं के पास कितनी संपत्ति थी और आज उसमें कितना इजाफा हुआ है, यह भी किसी से छिपा नहीं है. ऐसे में केवल 25 हजार रुपये का चश्मा पहनने को बड़ा मुद्दा बनाना सही नहीं है.
बीजेपी के कई नेताओं के शौक महंगे
वहीं, धीरेंद्र कुमार ने यह भी कहा कि बीजेपी के कई नेता खुद महंगी चीजों के शौक रखते हैं, लेकिन इसका यह मतलब नहीं निकाला जा सकता कि उन्होंने पैसा लूटकर कमाया है. उसी तरह तेजस्वी यादव को लेकर भी इस तरह के आरोप लगाना गलत है. धीरेंद्र कुमार ने कहा कि तेजस्वी यादव कोई आम राह चलते व्यक्ति के बेटे नहीं हैं, बल्कि वे दो-दो मुख्यमंत्रियों के पुत्र हैं. ऐसे में अगर वे 25 हजार नहीं, बल्कि ढाई लाख रुपये का चश्मा भी पहनते हैं, तो इसमें कोई हैरानी या गलत बात नहीं है.
हर कोई अपने हैसियत से महंगा शौक रखता है
रमेश ने भी इस मुद्दे को ज्यादा तूल न देने की बात कही. उन्होंने कहा कि यह कोई बड़ी बात नहीं है, हर व्यक्ति अपनी हैसियत के अनुसार या उससे भी अधिक शौक रखता है. अगर तेजस्वी यादव को 25 हजार रुपये के चश्मे का भी शौक है, तो इसमें गलत क्या है. विदेश यात्रा को लेकर रमेश ने कहा कि अभी-अभी नई सरकार बनी है. ऐसे में शुरुआत से ही विरोध शुरू कर देना ठीक नहीं होता है. उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव ने नई सरकार को काम करने का मौका दिया है. कुछ समय तक वे सरकार के कामकाज को देखेंगे और अगर सरकार उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती है, तभी उसके खिलाफ विरोध और राजनीति शुरू करेंगे.
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