राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। करीब साढ़े तीन दशक पुराने एक मामले में पटना की एक विशेष अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए पप्पू यादव समेत तीन आरोपियों के खिलाफ कुर्की-जब्ती (Attachment of Property) का आदेश जारी किया है। इस आदेश के बाद पटना पुलिस की टीम शुक्रवार को कार्रवाई के लिए उनके मंदिरी स्थित आवास पहुंची। पप्पू यादव से पुलिस रिक्वेस्ट कर रही है चलने के लिए, लेकिन उन्होंने कहा कि अभी हम नहीं जाएंगे। कानून भी ऐसा नहीं कहता है। कोर्ट के लिए ही तो हम आए हैं, कल हम जाएंगे। उनसे पुलिस लगातार रिक्वेस्ट कर रही है कि हम लोग आपको कोर्ट लेकर चलेंगे लेकिन पप्पू यादव का रहे हैं कि नहीं हम आपके साथ नहीं जाएंगे। क्या है पूरा मामला? यह विवाद साल 1995 का है, जब पटना के गर्दनीबाग थाने में विनोद बिहारी लाल नामक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप है कि पप्पू यादव और उनके सहयोगियों ने धोखाधड़ी कर उनका मकान किराए पर लिया था। मकान मालिक का दावा है कि किराए पर लेते समय यह जानकारी छिपाई गई थी कि वहां सांसद का कार्यालय चलाया जाएगा। लंबे समय से गैरहाजिरी यह मामला पिछले 30 वर्षों से लंबित है। बताया जा रहा है कि कोर्ट में बार-बार बुलाए जाने के बावजूद आरोपी पेश नहीं हो रहे थे, जिसके बाद अदालत ने यह कड़ा कदम उठाया है। विशेष अदालत ने केवल पप्पू यादव ही नहीं, बल्कि इस मामले में नामजद दो अन्य सहयोगियों पर भी कार्रवाई का निर्देश दिया है: पप्पू यादव (सांसद, पूर्णिया), शैलेंद्र प्रसाद
चंद्र नारायण प्रसाद 7 फरवरी को अगली सुनवाई पुलिस की सक्रियता और कुर्की के आदेश ने हलचल तेज कर दी है। अदालत ने इस मामले में 7 फरवरी की तारीख अगली सुनवाई के लिए मुकर्रर की है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सांसद कोर्ट में आत्मसमर्पण करते हैं या कानूनी टीम के जरिए राहत पाने की कोशिश करेंगे।
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