12वीं पास करते ही पहुंच गई मिस बिहार के मंच पर
मिस बिहार प्रतियोगिता में सेकंड रनर अप मिताली राज ने लोकल 18 से खास बातचीत करते हुए बताती हैं कि यह उनका पहला पेजेंट था और पहली ही कोशिश में सेकंड रनर अप बनना उनके लिए किसी सपने से कम नहीं रहा. भले ही पहला स्थान न मिला हो, लेकिन सेकंड रनर अप का ताज घर ले जाना उनके लिए काफी मायने रखता है. उन्होंने कहा कि आज कहीं न कहीं मैंने अपनी मां का सपना पूरा कर दिया है. आगे मेरी कोशिश रहेगी कि मिस इंडिया और फिर मिस यूनिवर्स का ताज भी मां के सिर पर सजाऊं.
रैंप वॉक करते मां बजा रही थी ताली
मिस बिहार के फिनाले की स्टेज पर बेटी के रैंप वॉक करते ही नीचे खड़ी मां की आंखों में खुशी साफ झलक रही थी. तालियों की गूंज के बीच मां की उत्सुकता हर किसी को नजर आई. प्रतियोगिता में मौजूद लोगों ने भी माना कि उन्होंने किसी मां को इतना ज्यादा एक्साइटेड पहले कभी नहीं देखा. बेटी मिताली का कहना है कि मां का यही उत्साह उनकी सबसे बड़ी ताकत है.
डॉक्टर बनकर भी करेंगी रैंप वॉक
पिछले साल ही 12वीं की परीक्षा पास करने वाली मिताली फिलहाल नीट की तैयारी कर रही हैं. उनका लक्ष्य डॉक्टर बनना है, लेकिन इसके साथ ही मॉडलिंग और ब्यूटी पेजेंट की दुनिया में भी आगे बढ़ना है. वह कहती हैं, ‘मैं पढ़ाई भी जारी रखूंगी और रैंप वॉक भी. डॉक्टर बनने के बाद भी इस तरह की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेती रहूंगी’.
ऑडिशन में सिलेक्शन होते ही झूम उठी
मिस बिहार प्रतियोगिता के सफर को याद करते हुए उन्होंने बताया कि ऑडिशन के लिए करीब 40 लड़कियां पहुंची थी. शुरुआती दौर में इंट्रोडक्शन राउंड हुआ. इसके बाद फोन कॉल के जरिए अगले राउंड के लिए सिलेक्शन की जानकारी दी गई. कॉल आते ही मैं खुशी से झूम उठीं. क्योंकि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि पहले ही प्रयास में उनका चयन हो जाएगा. इसके बाद एक हफ्ते का ग्रूमिंग सेशन चला. इसमें स्टेज प्रेजेंस, रैंप वॉक, कम्युनिकेशन और आत्मविश्वास से बोलने की बारीकियां सिखाई गईं.
बड़ी दीदी बनी मेंटर
वहीं, अगर हम परिवार की बात करें तो मिताली दो बहनों में छोटी हैं. बड़ी बहन उनसे 12 साल बड़ी हैं और फिलहाल एम्स पटना में सीनियर नर्सिंग ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं. पिता रेलवे इंजीनियर हैं और लखनऊ में तैनात हैं. मां हाउस मेकर हैं और बेटी के साथ पटना में रहती हैं.
मिताली बताती हैं कि इस पूरे सफर में मां और दीदी का भरपूर सहयोग मिला. बड़ी बहन उनकी मेंटर रहीं. इंग्लिश कम्युनिकेशन से लेकर सवालों के प्रभावी जवाब तक, हर लेवल पर उनका मार्गदर्शन मिला. जैसे-जैसे हर राउंड में चयन होता गया, परिवार का भरोसा और मजबूत होता चला गया.
मिताली आगे कहती हैं कि बचपन से ही सपना था कि 12वीं के बाद नीट की तैयारी के साथ इस क्षेत्र में कदम रखना है. अब शुरुआत शानदार हुई है तो आगे का सफर भी उतना ही दमदार और यादगार होगा. इसके लिए मैं खूब मेहनत करूंगी.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.