Madhubani Medical College viral circular fact check : सोशल मीडिया की दुनिया में कोई खबर या सूचना कभी कभी आग से भी ज्यादा तेजी से फैलता है. मधुबनी से ऐसा ही एक सर्कुलर वायरल हुआ जिसने छात्रों, अभिभावकों और आम लोगों को हैरान कर दिया. रमजान के पवित्र महीने का हवाला देते हुए लड़का और लड़की के साथ खड़े होने पर निकाह कराने की बात लिखी गई. देखते ही देखते यह आदेश पत्र सोशल मीडिया में मजाक, गुस्से और बहस का कारण बन गया. लेकिन जब सच्चाई सामने आई तो पूरा मामला फर्जी निकला.
मधुबनी मेडिकल कॉलेज के नाम पर फैली फर्जी खबर का सच जानिए. (AI जेनरेटेड)
फैक्ट चेक: सर्कुलर फर्जी साबित
फैक्ट चेक से पता चला कि यह सर्कुलर फर्जी है. कॉलेज की आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया पर कोई ऐसा नोटिस नहीं है. इसी तरह की फर्जी खबरें पहले भी वायरल हुई हैं, जैसे जामिया मिलिया इस्लामिया का फर्जी सर्कुलर जो फरवरी 2026 में मीम बना. मधुबनी मेडिकल कॉलेज ने इंस्टाग्राम पर स्पष्ट किया कि यह फेक है और कोई ऐसा कम्युनिकेशन जारी नहीं किया गया. यह अफवाह सोशल मीडिया पर तेजी से फैली, लेकिन कॉलेज ने तुरंत खंडन किया. ऐसी फर्जी खबरें समाज में भ्रम फैलाती हैं और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकती हैं.
बिहार के मधुबनी जिले स्थित मधुबनी मेडिकल कॉलेज के नाम से 25 फरवरी 2026 का एक सर्कुलर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. इसमें दावा किया गया कि रमजान के दौरान किसी भी लड़का और लड़की को साथ खड़े पाए जाने पर उनका तुरंत निकाह करा दिया जाएगा और वलीमा की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होगी.
कॉलेज की सफाई नोटिस
सोशल मीडिया में सर्कुलर वायरल होने के बाद कॉलेज ने एक महत्वपूर्ण सूचना जारी की है जिसमें कहा गया है कि 25 फरवरी 2026 का वह सर्कुलर फर्जी है. सोशल मीडिया पर प्रसारित यह दस्तावेज कॉलेज द्वारा जारी नहीं किया गया. कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह फर्जी और बदली हुई सूचना है. इसमें कहा गया है कि- छात्रों, अभिभावकों और संबंधित हितधारकों से अनुरोध है कि ऐसी अप्रमाणित सूचनाओं पर ध्यान न दें और न फैलाएं. कॉलेज केवल आधिकारिक माध्यमों से सूचना जारी करता है. ऐसी फर्जी सूचनाओं के लिए कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
मधुबनी मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने साफ किया है कि यह दस्तावेज पूरी तरह फर्जी और बदला हुआ है तथा ऐसे कृत्य पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है. छात्रों और अभिभावकों से अपील है कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें.
वायरल होने का कारण
यह सर्कुलर रमजान से ठीक पहले वायरल हुआ तो लोग इसे मीम और जोक्स में बदल रहे हैं. कुछ यूजर्स ने इसे मजाकिया बताया, जबकि अन्य ने इसे धार्मिक भेदभाव का उदाहरण माना. लेकिन कॉलेज का कहना है कि यह पूरी तरह फर्जी है और इसका उद्देश्य कॉलेज की छवि खराब करना हो सकता है. बिहार जैसे राज्य में जहां मेडिकल शिक्षा महत्वपूर्ण है, ऐसी अफवाहें छात्रों के मनोबल पर असर डाल सकती हैं. मधुबनी मेडिकल कॉलेज ने चेतावनी दी है कि फर्जी सूचना फैलाने वालों पर कानूनी कार्रवाई होगी. छात्रों से अपील की गई है कि आधिकारिक स्रोतों से ही जानकारी लें.
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