Bihar Rajya Sabha Elections: बिहार राज्यसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने प्रदेश की सियासत में भूचाल ला दिया है. एनडीए की क्लीन स्वीप के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बड़ा धमाका करते हुए बीजेपी पर धनतंत्र और प्रशासनिक दुरुपयोग के गंभीर आरोप लगाए हैं. राजद उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह ने कहा कि हम जीत कर भी हार गए? पढ़ें इस सियासी खेला की पूरी इनसाइड स्टोरी.
सीएम नीतीश कुमार-तेजस्वी यादव. (फाइल फोटो)
नंबर पूरे थे, लेकिन अपनों ने ही दिया धोखा
परिणामों के बाद तेजस्वी यादव ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि महागठबंधन की हार उसकी संख्या बल की कमी से नहीं बल्कि भितरघात से हुई है. तेजस्वी ने आंकड़ों का गणित समझाते हुए कहा कि महागठबंधन के पास 35 विधायकों की अपनी ताकत थी. हमने एआईएमआईएम के 5 और बीएसपी के 1 विधायक का समर्थन हासिल कर लिया था. जिससे हमारा आंकड़ा 41 तक पहुंच गया था. जीत के लिए यही नंबर चाहिए था, लेकिन अंतिम समय में हमारे 4 विधायक (3 कांग्रेस और 1 राजद) गायब हो गए. तेजस्वी ने साफ लहजे में कहा कि अगर ये लोग पीठ में छुरा नहीं घोंपते, तो आज तस्वीर कुछ और होती. उन्होंने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि गायब होने वाले इन चार विधायकों को पार्टी समय आने पर जवाब देगी.
बीजेपी का नेचर है बेईमानी और धनतंत्र
बीजेपी पर हमला बोलते हुए तेजस्वी ने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष ने प्रशासनिक तंत्र और पैसे के जोर पर चुनाव को प्रभावित किया है. उन्होंने कहा कि बीजेपी का इतिहास रहा है कि वे जबरन चुनाव जीतना चाहते हैं. चाहे वह मशीन तंत्र हो, धन तंत्र हो या बेईमानी वे इसमें माहिर हैं. तेजस्वी के मुताबिक विपक्ष ने झुकने के बजाय लड़ने का फैसला किया और विचारधारा की यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी.
जीत कर भी हार गए एमजीबी उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह
राजद के उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह ने हार के बावजूद नैतिक जीत का दावा किया. उन्होंने कहा कि हम जीत कर भी हार गए हैं. हमारे पास संख्या बल मौजूद था, लेकिन हॉर्स ट्रेडिंग (विधायकों की खरीद-फरोख्त) ने सारा खेल बिगाड़ दिया. हमारे गठबंधन के जो 4 वोटर नहीं आए, उन्होंने लोकतंत्र के साथ धोखा किया है.
सियासी समीकरण और भविष्य के संकेत
इस चुनाव ने बिहार की राजनीति में नए समीकरणों को जन्म दिया है. जहां एक ओर एनडीए ने अपनी एकजुटता साबित की है. वहीं विपक्ष के भीतर की दरार भी उजागर हो गई है. कांग्रेस के 3 विधायकों का ऐन वक्त पर मतदान से दूरी बनाना राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की साझा रणनीति के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है. आने वाले दिनों में इन बागी विधायकों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई बिहार की सियासत को और गरमा सकती है.
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