1.जंगल राज से मुक्ति
नीतीश कुमार ने 2005 के आखिर में बिहार की सत्ता संभाली. उनकी पहली और बड़ी उपलब्धि यह रही कि उन्होंने ‘जंगल राज’ वाले राजद के 15 साल पुराने वर्चस्व को ध्वस्त किया. बिहार में कानून का राज कायम किया. अपराधियों पर सख्ती बरती और स्पेशल कोर्ट बना कर अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया. 2005-2010 के अपने पहले कार्यकाल में जनवरी 2006 से अगस्त 2010 तक 52,343 अपराधियों का दोषी ठहराया जाना नीतीश कुमार के स्पेशल कोर्ट बनाने का नतीजा था. आपराधिक मुकदमों के स्पीडी ट्रायल से यह संभव नहीं हो पाया. अपराध की दुनिया से राजनीति में आए कई कुख्यातों की जगह जेल हो गई. मोहम्मद शहाबुद्दीन (राजद के तत्कालीन सांसद, अब दिवंगत) को अपहरण और हत्या के मामलों में ऐसी सजा मिली कि जेल में रहते ही उनका निधन हो गया. पूर्णिया के मौजूदा सांसद पप्पू यादव को साम्यवादी नेता अजित सरकार की हत्या मामले में आजीवन कारावास की सजा मिली. पूर्व सांसद सुरजभान सिंह हत्या और अन्य अपराधों के आरोप में दोषी ठहराए गए. आनंद मोहन को तो मौत की सजा मिली. हालांकि बाद में ऊपरी अदालत में सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया. सुनील पांडेय, मुन्ना शुक्ला समेत कई बड़े बाहुबलियों को सीखचों तक पहुंचा कर नीतीश ने जंगल राज की छवि से बिहार को मुक्ति दिलाई.
2.बुनियादी ढांचा बनाया
राजद के शासन में बिहार के बुनियादी ढांचे पर कोई ध्यान ही नहीं था. मुख्य सड़कें भी गड्ढे में तब्दील थीं. लालू तब कहा करते थे कि अच्छी सड़कें गरीबों के लिए जरूरी नहीं. अच्छी सड़कें तो अमीरों को अपनी गाड़ियां फर्राटे से दौड़ाने के लिए चाहिए. पर, नीतीश ने सड़क, बिजली और पानी जैसे बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित किया. आज बिहार की सड़कें दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों को आकर्षित करती हैं तो इसका सारा श्रेय नीतीश कुमार को जाता है. गांव-गली से लेकर दूरस्थ शहरों के लिए नीतीश ने अच्छी सड़कें बनवाईं. बिजली की तो ऐसी मुकम्मल व्यवस्था की कि हर घर 20-22 घंटे बिजली अब सुदूर गांवों में भी रहने लगी है. नदियों पर कई पुल बनवाए. यह क्रम अब भी जारी है. ग्रामीण इलाकों तक सड़कों की कनेक्टिविटी के लिए टोलों-मुहल्लों में बनी सड़कें नीतीश की उपलब्धि बयां कर रही हैं.
3.महिला सशक्तिकरण
नीतीश ने महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई ऐसे काम शुरू किए, जो आज दूसरों के लिए नजीर बनी हुई हैं. इनमें पहला बड़ा काम उन्होंने बालिका साइकिल योजना से शुरू किया. 2006-07 में शुरू की गई इस योजना से लाखों लड़कियों को साइकिलें मिलीं. इसका सुफल यह रहा कि स्कूल बच्चियों को आकर्षित करने लगे. ड्रॉपआउट रेट में कमी आई. लड़कियों की सेकेंडरी शिक्षा में नामांकन दोगुने से अधिक हुए. महिला सशक्तिकरण की दिशा में नीतीश का दूसरा क्रांतिकारी कदम पंचायती राज और नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण रहा. उन्होंने यह काम तब शुरू किया, जब संसदीय व्यवस्था में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण को लेकर बहसें तो होतीं, लेकिन प्रस्ताव पास नहीं होता. राष्ट्रीय स्तर यह प्रस्ताव भाजपा शासन में संभव हो पाया. इतना ही नहीं, महिलाओं के प्रति नीतीश की उदारता इससे भी समझी जा सकती है कि सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान सबसे पहले बिहार में उन्होंने ही लागू किया. आज दूसरे राज्य महिलाओं को तात्कालिक लाभ देकर लुभाने का प्रयास कर रहे हैं. ज्यादातर इसमें सफल भी हुए हैं, लेकिन नीतीश ने 2006-07 में जो किया, वह आज उनकी स्थायी राजनीतिक संपत्ति बन गई है.
4.जीविका परियोजना
नीतीश कुमार ने महिलाओं के स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने के लिए 2006-07 में जीविका परियोजना की शुरुआत की थी. यह देश की अनूठी परियोजना थी. बाद में कई अन्य राज्यों ने भी इसे अपने यहां लागू किया. केंद्र सरकार ने इस योजना की नकल की. इस योजना से ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों के जरिए आर्थिक रूप से सशक्त किया गया. बिहार में करीब ढाई करोड़ महिलाएं इस योजना से जुड़ी हुई हैं. उन्हें रोजगार और आय के नए साधन मिले. विधानसभा चुनाव 2025 से पहले नीतीश कुमार ने जीविका से जुड़ी महिलाओं के लिए एक नई स्कीम लांच की. जीविका दीदियों को उन्होंने 10 हजार की नकद राशि देकर स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया. इतना ही नहीं, स्वरोजगार की दिशा में बढ़ रही महिलाओं के काम की प्रगति को देखते हुए नीतीश ने और 2 लाख रुपए की सहाययता की घोषणा की है. राजनीतिक रूप से इसका लाभ भी नीतीश को मिला. विपक्ष के जो लोग नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू को डूबता जहाज मान रहे थे, वह आज विधानसभा में दूसरा बड़ा दल है. लोकसभा में उसके भाजपा के बराबर 12 सांसद हैं.
5.शराबबंदी कानून बना
नीतीश का एक और उल्लेखनीय काम लोग कभी नहीं भूलेंगे. उन्होंने 2016 में बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू की. कहा जाता है कि महिलाओं की सलाह पर उन्होंने यह फैसला लिया. इससे महिलाओं और परिवारों में सुरक्षा और बचत की शुरुआत हुई. शराबबंदी कानून की विपक्षी नेताओं ने खूब आलोचना की. एनडीए के भी कुछ नेता इसे लेकर नीतीश पर हमलावर हुए. समीक्षा की मांग होती रही. पर, नीतीश अपने फैसले से टस से मस नहीं हुए. यह भी सच है कि पूर्ण शराबबंदी से बिहार को बड़े पैमाने पर राजस्व का नुकसान बीते 10 साल में हुआ है. नीतीश ने आमदनी का दूसरा जरिया तलाशा, लेकिन शराबबंदी के फैसले पर पुनर्विचार से साफ मना कर दिया. चूंकि यह निर्णय उन्होंने महिलाओं की सलाह पर लिया था, इसलिए महिलाएं भी उनके साथ हर समय खड़ी रहीं.
6.जाति आधारित गणना
जाति जनगणना की लंबे से हो रही मांग को नीतीश सरकार ने सबसे पहले पूरा किया. इसके लिए उन्होंने अपने दम पर 500 करोड़ रुपए खर्च किए. इस काम में अदालती व्यवधान भी आए, पर सबसे निपटते हुए नीतीश ने बिहार में जाति गणना का काम पूरा करा दिया. हालांकि इसका कोई उल्लेखनीय लाभ अभी तक किसी को नहीं मिला है, लेकिन नीतीश ने गणना में निकले गरीबी रेखा से नीचे बसर करने वाले परिवारों की पहचान कर उन्हें सरकारी सहायता का फैसला किया. देश में जाति गणना कराने वाला बिहार पहला राज्य बन गया. बिहार की ही तर्ज पर तेलंगाना में जाति गणना हुई. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पहले नीतीश के इस काम को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने की बात कही थी, लेकिन बाद में उन्होंने इसे फालतू करार दिया. राहुल के सुर तब बदले, जब नीतीश महागठबंधन छोड़ एनडीए के साथ चले गए.
7.बड़े पैमाने पर भर्तियां
बिहार में नीतीश कुमार ने बड़े पैमाने पर सरकारी नौकरियां भी बांटी है. उन्होंने अपने पहले कार्यकाल (2005-2010) में ही 1 लाख से ज्यादा स्कूली शिक्षकों की भर्ती की. बाद में भी बड़े पैमाने पर शिक्षकों की नियुक्ति बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से हुई. स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं भी बढ़ाईं गईं. मिड-डे मील और अन्य योजनाओं से शिक्षा के स्तर में सुधार आया. हाल के वर्षों में नीतीश ने 10 लाख नौकरियां दी हैं. उन्होंने अगले 5 साल में 1 करोड़ रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा है.
8.महादलित आयोग बना
नीतीश कुमार ने बिहार में महादलित आयोग का गठन 2007 में किया था. यह भी नीतीश कुमार का अनूठा प्रयोग था. अनुसूचित जाति वर्ग को उन्होंने 2 श्रेणियों में बांटा, ताकि वास्तविक रूप से पिछड़ी दलित जातियों को विकास की मुख्य धारा में लाया जा सके. अनुसूचित जातियों में सबसे पिछड़े वर्गों को महादलित माना गया. महादलित आयोग का उद्देश्य अनुसूचित जातियों में सबसे कमजोर और विकास से वंचित उप-जातियों की पहचान करना, उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का अध्ययन करना और उत्थान के लिए सिफारिशें सुझाना था. आयोग ने अपनी अंतरिम रिपोर्टों में शुरू में 18 अनुसूचित जातियों को महादलित घोषित किया. 2007 में ही बिहार महादलित विकास मिशन भी शुरू किया गया, जो योजनाओं को लागू करने का माध्यम बना.
9.पसमांदा के लिए योजना
नीतीश कुमार ने पसमांदा (पिछड़े) मुसलमानों के लिए भी कई योजनाएं शुरू कीं. मुसलमानों में तकरीबन 73 प्रतिशत पसमांदा आबादी है. यह राजनीतिक रूप से भी नीतीश के लिए लाभकारी रहा. नीतीश की योजनाओं से पसमांदा मुसलमानों तक सरकारी लाभ पहुंचा. उन्हें आवास, शिक्षा के अलावा वित्तीय मदद मिली. राजनीति में भी उन्हें प्रतिनिधित्व मिला. इसी समाज से आने वाले अली अनवर को नीतीश ने 2 टर्म के लिए राज्यसभा भेजा. नीतीश ने अल्पसंख्यक कल्याण के बजट में बढ़ोतरी की. इस समाज की परित्यक्ता महिलाओं को नीतीश ने मासिक वित्तीय सहायता का भी प्रावधान किया. यह भी देश में नीतीश की अनूठी योजनाएं मानी गईं.
10.गठबंधन सरकार चलाई
नीतीश कुमार शुरू से ही एनडीए के साथ रहे. वे एनडीए सरकार में केंद्रीय मंत्री रहे. बिहार 2005 में वे एनडीए सरकार के सीएम बने. तब से लेकर अब तक वे किसी न किसी गठबंधन सरकार के ही प्रमुख की भूमिका में रहे. उन्हें राजद और कांग्रेस जैसी इंडिया ब्लाक की पार्टियों के साथ भी सरकार चलाने का 2 बार मौका मिला. वे गठबंधन बदलते रहे, लेकिन सत्ता उनके ही हाथ में रही. लगातार 20 साल गठबंधन की सरकार वे सुचारु ढंग से चलाते रहे. किसी राज्य में लंबे वक्त तक गठबंधन सरकार चलाने का अनुभव एकमात्र नीतीश कुमार को ही है.
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