पटियाला की राजीव गांधी नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी का नाम बदला जा सकता है। इसमें से राजीव गांधी का नाम हटाने का प्रस्ताव किया जा रहा है। नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की अकादमिक काउंसिल ने विश्वविद्यालय के नाम से पूर्व प्रधानमंत्री Rajiv Gandhi का नाम हटाने का प्रस्ताव पारित किया है। यह प्रस्ताव अब मैनेजमेंट बोर्ड को भेजा जाएगा। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद अंतिम निर्णय के लिए मामला पंजाब सरकार के पास जाएगा। विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2006 में पंजाब अधिनियम के तहत हुई थी। राज्य तब कांग्रेस की सरकार थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंदर सिंह ने विधान सभा प्रस्ताव पारित कर इसकी स्थापना की थी। अब इसका नाम बदला जाएगा। इस फैसले को लेकर विरोध और समर्थन का दौर भी शुरू हो गया है। अभी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कांग्रेस सांसद ने किया विरोध कांग्रेस सांसद डॉ. धर्मवीर गांधी ने प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए इसे अनुचित बताया है। उनका कहना है कि संस्थानों के नाम बदलना समाधान नहीं है। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने नाम परिवर्तन की प्रक्रिया को चुनावी कदम करार देते हुए सरकार से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास जैसे मुद्दों पर ध्यान देने की बात कही है। अब मैनेजमेंट बोर्ड और राज्य सरकार के निर्णय के बाद ही विश्वविद्यालय के नाम को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। AAP व अकाली दल के कुछ नेता पक्ष में वहीं आम आदमी पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के कुछ नेताओं ने इस कदम का समर्थन किया है। अकाली दल से जुड़े नेताओं का तर्क है कि 1984 के सिख विरोधी दंगों की पृष्ठभूमि को देखते हुए विश्वविद्यालय के नाम पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.