इस होली पन्ना के बाजार रसायनों से मुक्त और प्राकृतिक रंगों से सराबोर नजर आएंगे। मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने गेंदा, गुलाब और चुकंदर जैसी प्राकृतिक चीजों से शुद्ध हर्बल गुलाल तैयार किया है। इन उत्पादों की बिक्री के लिए 28 फरवरी और 1 मार्च को टाउन हॉल परिसर में दो दिवसीय ‘होली उत्सव मेला’ लगाया जा रहा है। त्वचा के लिए सुरक्षित और पूरी तरह ईको-फ्रेंडली कलेक्टर उषा परमार और जिला पंचायत सीईओ उमराव सिंह मरावी के मार्गदर्शन में शुरू हुई इस पहल का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित रंग उपलब्ध कराना है। जिला परियोजना प्रबंधक प्रमोद शुक्ला ने बताया कि यह गुलाल पालक, सिंदूर, गुलाब और गेंदे के फूलों से बनाया गया है। यह पूरी तरह ईको-फ्रेंडली है, जिससे न तो त्वचा पर रैशेज पड़ेंगे और न ही सांस लेने में कोई तकलीफ होगी। एक ही छत के नीचे मिलेगा होली का हर सामान जिला प्रबंधक ओ.पी. सोनी ने बताया कि मेले में केवल गुलाल ही नहीं बल्कि होली की पूरी किट उपलब्ध होगी। यहां दीदियों के हाथों के बने विशेष उत्पाद मिलेंगे। पूजन सामग्री: गोबर के बल्ले, नजरबट्टू किट और अगरबत्ती। पकवान: शुद्ध घी की गुझिया, नमकीन, बर्फी और ठंडाई। अन्य उत्पाद: आंवला कैंडी, हर्बल उत्पाद और हस्तनिर्मित होली वस्त्र। ‘वोकल फॉर लोकल’ को मिलेगा बढ़ावा यह आयोजन ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को मजबूत करने की एक कड़ी है। प्रशासन ने जिले के नागरिकों और अधिकारियों से अपील की है कि वे बाजार के मिलावटी रंगों के बजाय इन दीदियों द्वारा बनाए गए शुद्ध उत्पादों को खरीदें, ताकि स्थानीय महिलाओं के स्वरोजगार को समर्थन मिल सके। देखें तस्वीरें…
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