श्रेया के लिए यह सफर आसान नहीं था. यह उनका दूसरा प्रयास था. पहले प्रयास में वे महज दो अंकों से प्रीलिम्स परीक्षा पास करने से चूक गई थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी कमियों को दूर करते हुए और अधिक मेहनत के साथ दोबारा तैयारी की. उसी मेहनत का परिणाम है कि आज वे देश की शीर्ष प्रतिभाओं में शामिल हो गई हैं.
श्रेया ने अपनी स्कूली शिक्षा पानीपत के सेंट मैरी कॉन्वेंट स्कूल से पूरी की. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्री राम कॉलेज से ग्रेजुएशन किया. कॉलेज के अंतिम वर्ष से ही उन्होंने यूपीएससी की तैयारी को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया था. उन्होंने घर पर रहकर ऑनलाइन कोचिंग के माध्यम से तैयारी की और धीरे-धीरे प्रीलिम्स, मेंस और इंटरव्यू जैसे कठिन पड़ावों को पार करते हुए इस मुकाम तक पहुंचीं.
जब मिला रिजल्ट, तो थम गई सांसें
रिजल्ट घोषित होने के समय श्रेया अपनी मां के साथ घर पर थीं. जैसे ही उन्होंने रिजल्ट की पीडीएफ में अपना नाम ढूंढना शुरू किया, पहले कुछ पन्नों में नाम नहीं मिलने पर वे थोड़ी घबरा गईं. लेकिन जब 114वीं रैंक पर अपना नाम दिखाई दिया, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा. उन्होंने तुरंत पिता, भाई और दादा-दादी को वीडियो कॉल करके यह खुशखबरी साझा की. उस पल घर में खुशी और भावनाओं का माहौल बन गया.
समाज सेवा और महिला सशक्तिकरण पर फोकस
अपनी सफलता के बाद श्रेया ने कहा कि वे समाज सेवा के क्षेत्र में समर्पित होकर काम करना चाहती हैं. उनकी विशेष प्राथमिकताओं में महिला सशक्तिकरण, महिलाओं की शिक्षा और सुरक्षा शामिल हैं. इसके साथ ही बाल विकास के क्षेत्र में भी वे काम करना चाहती हैं. उन्होंने यह भी कहा कि यदि उन्हें भारतीय विदेश सेवा (IFS) में जाने का अवसर मिलता है, तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए गर्व की बात होगी.
मां बोलीं—शब्दों में बयान नहीं हो रही खुशी
श्रेया की मां पूनम ने भावुक होते हुए कहा, “मुझे जो महसूस हो रहा है, उसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है. हम काफी समय से रिजल्ट का इंतजार कर रहे थे. अब जब रिजल्ट आया है तो खुशी का ठिकाना नहीं है.” उन्होंने बताया कि श्रेया ने सुबह से लेकर देर रात तक जी-तोड़ मेहनत की, क्योंकि उसे डर था कि अगर इस बार सफलता नहीं मिली तो उसका मनोबल टूट सकता है. “हम हर कदम पर उसके साथ थे और उसने भी पूरी लगन के साथ मेहनत की ताकि कोई कसर न रह जाए.” पिता ने कहा कि इससे बड़ी खुशी किसी पिता के लिए नहीं है. श्रेया के पिता रमेश गुप्ता ने कहा कि यह उनके परिवार के लिए बेहद गर्व का क्षण है. “किसी भी पिता के लिए इससे बड़ी खुशी क्या हो सकती है कि उसकी संतान एक प्रतिष्ठित पद पर पहुंचे और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में सफलता हासिल करे.” उन्होंने कहा कि वे चाहते हैं कि उनकी बेटी देश की सेवा करे और राष्ट्र के लिए एक महत्वपूर्ण संपत्ति बने. परिवार का मानना है कि भगवान के आशीर्वाद और श्रेया की मेहनत से ही उसे दूसरे ही प्रयास में इतनी शानदार सफलता मिली है.
अब ट्रेनिंग और नए सपनों की शुरुआत
श्रेया ने कहा कि फिलहाल वे अपनी इस सफलता का आनंद लेंगी और आगे ट्रेनिंग के दौरान अपना सर्वश्रेष्ठ देने का प्रयास करेंगी, ताकि वे एक जिम्मेदार और संवेदनशील अधिकारी बनकर देश की सेवा कर सकें.
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