पानीपत जिले के नौल्था गांव में फाग महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। यह सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है, जिसे ग्रामीणों ने हर्षोल्लास के साथ कायम रखा। दोपहर लगभग 2:30 बजे सैकड़ों साधुओं ने झांकियों के आगे पैदल चलकर गांव की शोभा बढ़ाई। मुख्य महंत बाबा लाठे वाले नरेश पुरी जी को पालकी में लाया गया। मान्यता के अनुसार, बाबा लाठे वाले जीवन में कभी पैदल गांव का भ्रमण नहीं करते। साल में केवल फाग के दिन ही उन्हें पालकी में बैठाकर गांव का चक्कर लगवाया जाता है। पुजारी ने सभी साधुओं का सम्मान किया महाभारत कालीन राधा कृष्ण मंदिर (अस्थल) पहुंचने पर मंदिर के पुजारी कपुरा राम ने सभी साधुओं का सम्मान किया। इसके बाद झांकियां आगे बढ़ीं। इस दौरान ग्रामीण नाचते-गाते, रंग-गुलाल उड़ाते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचे। झांकियां निकलने के बाद, गांव के पान्ना राजन सहित नौ चौपालों में सुबह से ही बड़े कढ़ाए में रंग उबालकर ठंडा करके रखा गया था। ग्रामीण सभी चौपालों रंग डलवाने गए सभी ग्रामीण पान्ना राजान के सामने एकत्रित हुए और समूह में पैदल चलकर गांव की प्रत्येक चौपाल पर रंग लगवाने पहुंचे। हर चौपाल पर रंग बरसाया गया। शाम 6:00 बजे पान्ना नरवान की चौपाल के नीचे पहुंचकर आखिरी रंग बरसाया गया, जिसके साथ फाग महोत्सव का समापन हुआ।
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