IDFC Bank Fraud News: चंडीगढ़ और पंचकूला में हुए करोड़ों के बैंक घोटाले मामले में बड़ा खुलासा हुआ है. जांच में सामने आया है कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के कर्मचारियों ने मिलकर सरकारी विभागों के पैसों पर हाथ साफ किया. फर्जी कंपनियां बनाकर और नकली बैंक स्टेटमेंट के जरिए सरकारी धन को खुर्द-बुर्द किया जा रहा था. विजिलेंस की छापेमारी में मर्सिडीज और फॉर्च्यूनर जैसी लग्जरी गाड़ियां और करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज मिले हैं. अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और 100 से ज्यादा बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए हैं.
IDFC First Bank घोटाले मामले में जानकारी देती एडीजीपी चारू बाली
जांच में सामने आया है कि सरकारी विभागों के खातों से पैसा निकालकर फर्जी कंपनियों के खातों में भेजा जाता था. इसके लिए आरोपियों ने ‘आर एस ट्रेडर्स’, ‘कैप को फिनटेक सर्विसेज’ और ‘स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट’ जैसी कई फर्जी कंपनियां बना रखी थीं. अभी तक की जांच में 8 सरकारी विभागों के 12 बैंक खातों में अनधिकृत लेन-देन का पता चला है. इनमें से 10 खाते आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (सेक्टर-32, चंडीगढ़) और 2 खाते एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में थे. पिछले एक साल के रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि कुल कितनी रकम का गबन हुआ है.
यह भी पढ़ें: IDFC फर्स्ट बैंक घोटाले में ईडी की बड़ी कार्रवाई, 19 ठिकानों पर छापेमारी, 590 करोड़ की हेराफेरी
ऐसे दिया जाता था वारदात को अंजाम, नकली स्टेटमेंट का खेल
इस घोटाले का तरीका बेहद शातिर था. बैंक कर्मचारी और उनके साथी फर्जी डेबिट मेमो तैयार करते थे. कई बार तो बिना किसी वैध चेक के ही करोड़ों रुपये इधर से उधर कर दिए जाते थे. पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने फर्जी बैंक स्टेटमेंट भी तैयार किए, ताकि संबंधित सरकारी विभागों को शक न हो. यह सारा पैसा उन खातों में भेजा गया जो सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से आरोपियों के रिश्तेदारों या उनके करीबियों के थे.
विजिलेंस की रेड, लग्जरी गाड़ियां और संपत्तियां बरामद
विजिलेंस ब्यूरो ने मामले की जड़ तक पहुंचने के लिए 16 जगहों पर सघन छापेमारी की है. इस दौरान 3 फॉर्च्यूनर, 2 इनोवा और 1 मर्सिडीज सहित कुल 6 कीमती गाड़ियां जब्त की गई हैं. शक है कि ये गाड़ियां घोटाले के पैसे से ही खरीदी गई थीं. इसके अलावा 10 ऐसी संपत्तियों की भी पहचान की गई है जिन्हें अपराध की कमाई से बनाया गया है. छापेमारी में 25 से अधिक मोबाइल फोन, लैपटॉप और अहम दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिनकी जांच अब साइबर फॉरेंसिक लैब में की जा रही है.
बैंक और सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत
इस पूरे घोटाले में अब तक जिन 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें 6 बैंक कर्मचारी, 4 निजी व्यक्ति और एक सरकारी कर्मचारी शामिल है. 10 आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में हैं, जबकि एक आरोपी से पुलिस रिमांड पर पूछताछ की जा रही है. जांच एजेंसी ने 100 से अधिक बैंक खातों पर रोक (डेबिट फ्रीज) लगाने के आदेश जारी कर दिए हैं. विजिलेंस ब्यूरो का कहना है कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़े सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है, क्योंकि कई नामों की पहचान अभी बाकी है.
About the Author

सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.