हरियाणा में पंचकूला जिले के रायपुर रानी तहसीलदार को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने 3 दिन का रिमांड खत्म होने पर मंगलवार को कोर्ट में पेश किया। जहां पुलिस को फिर 2 दिन का पुलिस रिमांड मिला है। रिमांड पूरा होने पर पुलिस 5 फरवरी को कोर्ट में पेश किया जाएगा। पंचकूला एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने मंगलवार को कोर्ट में 7 दिन का पुलिस रिमांड मांगा था। पुलिस ने रिमांड पेपर में कोर्ट कोर्ट को बताया कि अभी दूसरे अधिकारियों से जुड़ी जानकारियां हासिल करनी हैं तथा तहसीलदार विक्रम सिंगला से रिकवरी भी होनी है। जिसका बचाव पक्ष के अधिवक्ता दीपांशु बंसल ने विरोध करते हुए दलील रखी कि उनसे कोई रिकवरी अब तक नहीं हुई। एफआईआर में भी कहीं पैसे के लेन-देन का जिक्र नहीं है। केस डॉक्यूमेंट आधारित है, कहीं कोई शिकायतकर्ता नहीं है। ऐसे में रिमांड अब नहीं दिया जाना चाहिए। जिसके बाद कोर्ट ने 2 दिन कर रिमांड मंजूर किया। पर्ल ग्रुप से जुड़ी जमीन का मामला जिस जमीन की रजिस्ट्री के लिए तहसीलदार को गिरफ्तार किया गया है, वो पर्ल ग्रुप से जुड़ी है। जिस पर सुप्रीम कोर्ट से स्टे लगा हुआ बताया जा रहा है। वहीं, एसडीएम कार्यालय के एक पत्र के आधार पर तहसीलदार ने स्टे हटा हुआ मानते हुए रजिस्ट्री की थी। लेकिन अब एसडीएम ने ऐसे किसी पत्र पर खुद के साइन होने से इनकार दियाा है। जिसके बाद एसीबी ने जालसाजी कर नकली दस्तावेज तैयार करने की धारा भी जोड़ दी है। आ सकते हैं नए नाम सामने तहसीलदार की गिरफ्तारी और रिमांड के बाद अब केस में नए नाम भी सामने आ सकते हैं। राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारियों के मिलीभगत की दावा एसीबी से जुड़े सूत्र कर रहे हैं। हालांकि अभी तक अधिकारिक तौर पर ऐसा नहीं हुआ है। असल कहानी तहसीलदार विक्रम सिंगला का रिमांड पूरा होने के बाद ही खुलेगी।
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