Palamu News: जेएसएलपीएस की डीपीएम अनीता केरकेट्टा ने लोकल18 को बताया कि वर्तमान में यहां डिक्सी कंपनी के पुरुष अंडरगारमेंट्स का उत्पादन हो रहा है. अब तक 10 हजार पीस तैयार कर बाहर भेजे जा चुके है. फिलहाल करीब 50 महिलाएं यहां कार्यरत है. पार्क में लगभग 30 मशीनें लगी है, जिन पर 60 महिलाएं मिलकर काम कर रही है. आने वाले एक महीने में लाइट सेटिंग के बाद करीब 170 और मशीनें लगाई जाएंगी. लक्ष्य है कि लगभग 300 महिलाओं को यहां रोजगार से जोड़ा जाए.
कोयल आजीविका अपैरल पार्क की शुरुआत 2019 में हुई थी. इसका उद्देश्य स्थानीय महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराना था. यहां सरकारी विद्यालयों की वर्दी, मास्क, सेनेटाइजर और तिरंगे झंडे तक तैयार किए जाते थे. कोविड काल के दौरान यह केंद्र बंद हो गया और लंबे समय तक सुचारू रूप से संचालित नहीं हो सका. अब जिला प्रशासन ने इसे पुनर्जीवित करने के लिए युद्ध स्तर पर काम किया और लीजर एंड लाइफ स्टाइल कंपनी के साथ समझौता कर उत्पादन कार्य दोबारा शुरू कराया.
जेएसएलपीएस की डीपीएम अनीता केरकेट्टा ने लोकल18 को बताया कि वर्तमान में यहां डिक्सी कंपनी के पुरुष अंडरगारमेंट्स का उत्पादन हो रहा है. अब तक 10 हजार पीस तैयार कर बाहर भेजे जा चुके है. फिलहाल करीब 50 महिलाएं यहां कार्यरत है. पार्क में लगभग 30 मशीनें लगी है, जिन पर 60 महिलाएं मिलकर काम कर रही है. आने वाले एक महीने में लाइट सेटिंग के बाद करीब 170 और मशीनें लगाई जाएंगी. लक्ष्य है कि लगभग 300 महिलाओं को यहां रोजगार से जोड़ा जाए.
मैनेजर अशोक घोष के अनुसार, केंद्र में हर महीने 5 लाख पीस अंडरगारमेंट्स तैयार करने की योजना है. बाहर से अधिकारी और कंपनी प्रतिनिधि निरीक्षण के लिए आते है, गुणवत्ता जांच के बाद तैयार माल त्रिपुरा भेजा जाता है. पहले यहां महिलाएं ड्रेस सिलाई और अन्य छोटे उत्पादन कार्य करती थी. लेकिन अब आधुनिक मशीनों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का उत्पादन हो रहा है.
निकाह परवीन जो दो महीने पहले यहां जुड़ी है वो बताती है कि उन्होंने पहले कभी ऐसी मशीन पर काम नहीं किया था. अब आधुनिक मशीन पर काम कर अच्छा महसूस हो रहा है. पहले घर पर ही रहती थीं, लेकिन अब हर महीने लगभग 6 हजार रुपये वेतन मिल रहा है. जिसे आगे बढ़ाने का आश्वासन भी दिया गया है. एक घंटे में 60 पीस तैयार करने की क्षमता विकसित हो चुकी है.
कोयल आजीविका पार्क न केवल महिलाओं को रोजगार दे रहा है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास और पहचान भी दे रहा है. यह पहल ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रही है.
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