दरअसल, पूरे देश में इस समय टाइगर एस्टिमेशन का कार्य चल रहा है. इसी प्रक्रिया के तहत बाघों के साथ-साथ तेंदुआ, हायना जैसे अन्य मांसाहारी जीवों की भी गिनती की जा रही है. झारखंड में इस पूरे अभियान का नोडल केंद्र पलामू टाइगर रिजर्व को बनाया गया है. राज्यभर से एकत्र किए गए कैमरा ट्रैप, पगमार्क और अन्य साक्ष्य पीटीआर में संकलित किए जा रहे हैं.
राज्य के कई जिलों में तेंदुआ की पुष्टि
टाइगर एस्टिमेशन के दौरान यह भी सामने आया है कि तेंदुआ अब केवल पलामू तक सीमित नहीं है. गोड्डा, जमशेदपुर, हजारीबाग, रांची, चतरा, कोल्हान जैसे कई इलाकों में तेंदुआ की मौजूदगी के ठोस सबूत मिले हैं. यह संकेत देता है कि झारखंड का वन क्षेत्र तेंदुओं के लिए अनुकूल बनता जा रहा है.
पलामू में सबसे तेज बढ़ोतरी
डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जैना ने लोकल18 को बताया कि आंकड़ों पर नजर डालें तो 2018 की रिपोर्ट में पीटीआर क्षेत्र में तेंदुओं की संख्या 36 से 50 के बीच आंकी गई थी. वहीं 2023–24 की रिपोर्ट में यह संख्या करीब 50 बताई गई. अब टाइगर एस्टिमेशन के शुरुआती आंकड़े 150 के करीब तेंदुओं की ओर इशारा कर रहे हैं. हालांकि अंतिम और आधिकारिक संख्या भारत सरकार की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी.
वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट को भेजा जा रहा डाटा
टाइगर एस्टिमेशन से जुड़े सभी साक्ष्य—कैमरा ट्रैप फोटो, पगमार्क और फील्ड रिपोर्ट—वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया को भेजे जा रहे हैं. वहां विस्तृत अध्ययन के बाद ही झारखंड और पीटीआर में तेंदुओं की वास्तविक संख्या तय की जाएगी.
बाघों के क्षेत्र में भी बढ़ रही मौजूदगी
हालांकि आमतौर पर तेंदुआ और हायना बाघों के इलाके में आसानी से प्रवेश नहीं करते, लेकिन पलामू टाइगर रिजर्व में इनकी संख्या बढ़ना वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए अध्ययन का विषय बन गया है. टाइगर एस्टिमेशन में हायना की संख्या में भी वृद्धि दर्ज की गई है.
मानव-वन्यजीव संघर्ष की चिंता
उन्होंने कहा केजी तेंदुओं की बढ़ती संख्या के साथ मानव संघर्ष की घटनाएं भी चिंता का विषय हैं. दिसंबर 2021 से जनवरी 2022 के बीच गढ़वा और लातेहार क्षेत्र में तेंदुए के हमलों में पांच बच्चों की मौत हो चुकी है. हालात को देखते हुए पीटीआर प्रशासन ने उस समय देश के चर्चित शूटर को भी बुलाया था, हालांकि तेंदुआ बाद में गायब हो गया.
सरकारी रिपोर्ट का इंतजार
पीटीआर के उपनिदेशक प्रजेशकांत जेना के अनुसार, तेंदुओं की संख्या में बढ़ोतरी के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन अंतिम पुष्टि केंद्र सरकार की रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी. फिलहाल झारखंड के जंगलों में तेंदुओं की बढ़ती मौजूदगी वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा—दोनों के लिए नई चुनौती बनकर सामने आ रही है.
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