Palamu News: झारखंड सरकार ने पलामू के ऐतिहासिक कुंदरी लाह बगान के जीर्णोद्धार के लिए बजट में विशेष प्रावधान किया है. 421 एकड़ में फैले एशिया के इस सबसे बड़े प्राकृतिक लाह फार्म के पुनर्जीवित होने से करीब 1500 परिवारों को सीधा रोजगार मिलेगा और सालाना 100 करोड़ रुपये तक के राजस्व की उम्मीद है. 1980 के दशक के गौरवशाली इतिहास को फिर से जीवंत करने की इस पहल से स्थानीय ग्रामीणों में भारी उत्साह है. जिससे अब पलायन पर लगाम लगेगी.
लाह उत्पादन का केंद्र, 421 एकड़ का प्राकृतिक खजाना
421 एकड़ में फैला कुंदरी लाह बगान किसी समय पलामू की आर्थिक रीढ़ माना जाता था. वर्तमान में यहां पलास के करीब 90 हजार पेड़ मौजूद हैं. स्थानीय लोगों के संघर्ष की कहानी भी इस बगान से जुड़ी है. वर्ष 2013 में यहां केवल 35 हजार पेड़ बचे थे, लेकिन लगभग 750 ग्रामीणों ने दिन-रात पहरेदारी कर 2017 तक इनकी संख्या 1 लाख 25 हजार तक पहुंचा दी थी. अब सरकारी पहल के बाद इसे अपने पुराने वैभव को प्राप्त करने का मौका मिला है.
अर्थव्यवस्था में आएगा उछाल, 100 करोड़ तक के राजस्व की उम्मीद
वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने स्वयं बगान का निरीक्षण कर विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक की. अनुमान है कि जीर्णोद्धार के बाद इस बगान से सालाना 80 से 100 करोड़ रुपये तक का राजस्व प्राप्त हो सकता है. साथ ही रोजगार का अवसर मिलेगा. इस परियोजना से सीधे तौर पर करीब 1500 परिवारों को लाभ मिलेगा. विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक तरीके से लाह उत्पादन होने पर प्रति व्यक्ति सालाना आय 1.5 से 2 लाख रुपये तक हो सकती है.
इतिहास और जनभावना
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार 1980 के दशक में पलामू क्षेत्र करीब 4885 टन सीड लैक का उत्पादन करता था. यहां की बीज लाह की गुणवत्ता पूरे देश में मशहूर थी. ग्रामीण असगर अंसारी और चरण कुमार बताते हैं कि उन्होंने अपनी किशोरावस्था में लाह का वह स्वर्णिम दौर देखा है. जब बाहर से लोग इसे देखने आते थे. उनके अनुसार बगान के पुनर्जीवित होने से युवाओं को रोजगार की तलाश में पलायन नहीं करना पड़ेगा.
इको-टूरिज्म और पर्यावरण संरक्षण
राज्य सरकार की यह पहल केवल लाह उत्पादन तक सीमित नहीं है. इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2023 के अनुसार झारखंड का 29.76% हिस्सा वनाच्छादित है. सरकार ने वर्ष 2026-27 में 2.60 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य रखा है. इसी कड़ी में सारंडा, पाकुड़ और गुमला के साथ-साथ पलामू में भी इको-टूरिज्म और जैव विविधता पार्क विकसित किए जा रहे हैं. कुंदरी लाह बगान का जीर्णोद्धार न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय बनेगा, जो भविष्य में लाह उत्पादन और पर्यटन का एक बड़ा हब साबित होगा.
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