Palamu News: पलामू में कोयल आजीविका अपैरल पार्क फिर से शुरू हुआ है. इससे 300 महिलाओं को रोजगार मिलेगा. यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर के अंडरगारमेंट्स का प्रोडक्शन हो रहा है. वे महिलाएं जो पहले घर पर खाली रहती थी, वे अब यहां आकर अच्छी कमाई कर रही हैं.
2019 में हुई थी शुरुआत
कोयल आजीविका अपैरल पार्क की शुरुआत वर्ष 2019 में की गई थी. इसका उद्देश्य स्थानीय महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराना था. यहां सरकारी विद्यालयों की वर्दी, मास्क, सेनेटाइजर और तिरंगे झंडे तक तैयार किए जाते थे. कोविड काल के दौरान यह केंद्र बंद हो गया और लंबे समय तक सुचारू रूप से संचालित नहीं हो सका. अब जिला प्रशासन ने इसे पुनर्जीवित करने के लिए युद्ध स्तर पर काम किया और लीजर एंड लाइफ स्टाइल कंपनी के साथ एग्रीमेंट कर उत्पादन कार्य दोबारा शुरू कराया गया.
300 महिलाओं को रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य
जेएसएलपीएस की डीपीएम अनीता केरकेट्टा ने लोकल18 को बताया कि वर्तमान में यहां डिक्सी कंपनी के पुरुष अंडरगारमेंट्स का उत्पादन किया जा रहा है. अब तक 10 हजार पीस तैयार कर बाहर भेजे जा चुके हैं. फिलहाल करीब 50 महिलाएं यहां कार्यरत हैं. पार्क में लगभग 30 मशीनें लगी हैं, जिन पर 60 महिलाएं मिलकर काम कर रही हैं. आने वाले एक महीने में लाइट सेटिंग के बाद करीब 170 और मशीनें लगाई जाएंगी. लक्ष्य है कि लगभग 300 महिलाओं को यहां रोजगार से जोड़ा जाए.
अब हो रहा इंटरनेशनल लेवल का प्रोडक्शन
मैनेजर अशोक घोष के अनुसार, केंद्र में हर महीने 5 लाख पीस अंडरगारमेंट्स तैयार करने की योजना है. बाहर से अधिकारी और कंपनी प्रतिनिधि निरीक्षण के लिए आते हैं, गुणवत्ता जांच के बाद तैयार माल त्रिपुरा भेजा जाता है. पहले यहां महिलाएं ड्रेस सिलाई और अन्य छोटे उत्पादन कार्य करती थीं, लेकिन अब आधुनिक मशीनों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रोडक्शन हो रहा है.
पहले घर पर रहती थी, अब कमा रही 6 हजार
निकाह परवीन, जो दो महीने पहले यहां जुड़ी हैं, बताती हैं कि उन्होंने पहले कभी ऐसे मशीन पर काम नहीं किया था. अब आधुनिक मशीन पर काम कर अच्छा महसूस हो रहा है. पहले घर पर ही रहती थीं, लेकिन अब हर महीने लगभग 6 हजार रुपये वेतन मिल रहा है, जिसे आगे बढ़ाने का आश्वासन भी दिया गया है. एक घंटे में 60 पीस तैयार करने की क्षमता विकसित हो चुकी है.
कोयल आजीविका पार्क न केवल महिलाओं को रोजगार दे रहा है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास और पहचान भी दे रहा है. यह पहल ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रही है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें
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