Chane ka Sattu Recipe: चने का सत्तू और आचार बिहार, झारखंड, यूपी के मजदूरों का पौष्टिक, सस्ता भोजन है. फूड एक्सपर्ट शिव कुमार पांडे के अनुसार यह प्रोटीन, फाइबर, आयरन से भरपूर और ऊर्जा का स्रोत है. आइये जानते हैं इसके बारे में.
गर्मी हो या सर्दी, खेत-खलिहान से लेकर निर्माण स्थल तक काम करने वाले मजदूरों की थाली में चने का सत्तू और आचार खास जगह रखते हैं. यह केवल भोजन नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा है. सादा, सस्ता और तुरंत तैयार होने वाला यह आहार मेहनतकश लोगों को दिनभर की कड़ी मेहनत के लिए जरूरी ताकत देता है.

<br />बता दें कि चने का सत्तू और अचार, विशेषकर उत्तर भारत बिहार, झारखंड और यूपी में दिहाड़ी मजदूरों का एक अत्यंत पौष्टिक, सस्ता और सुपाच्य भोजन है. यह प्रोटीन का पावरहाउस है, जो कड़ी मेहनत करने वाले श्रमिकों को तुरंत ऊर्जा (Instant Energy) देता है.

पलामू के आयुर्वेद के जानकार शिव कुमार पांडे ने बताया कि डायट चने का सत्तू प्रोटीन, फाइबर, आयरन और कैल्शियम से भरपूर होता है. यह शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देता है और जल्दी भूख नहीं लगने देता. पसीना बहाकर काम करने वाले मजदूरों के लिए यह प्राकृतिक एनर्जी ड्रिंक की तरह काम करता है. इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर की कमजोरी दूर करने में सहायक होते हैं.
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काम करने वाले मजदूर के सत्तू के साथ खाया जाने वाला आचार स्वाद को बढ़ाता है. आम, मिर्च या नींबू का आचार भूख बढ़ाने में मदद करता है. आचार में मौजूद मसाले पाचन क्रिया को दुरुस्त रखते हैं. सादा सत्तू जब आचार के साथ मिलता है तो साधारण भोजन भी स्वादिष्ट और संतुलित बन जाता है.

महंगाई के दौर में जहां महंगे खाद्य पदार्थ आम आदमी की पहुंच से दूर होते जा रहे हैं. वहीं, चने का सत्तू किफायती विकल्प है. थोड़े से खर्च में पूरा परिवार पेट भर सकता है. मजदूर वर्ग के लिए यह भोजन आर्थिक रूप से भी सहायक है और पौष्टिकता के मामले में भी बेहतर साबित होता है.

मजदूरों के पास लंबे समय तक खाना बनाने का समय नहीं होता. सत्तू का घोल या सत्तू की लिट्टी तुरंत तैयार की जा सकती है. केवल थोड़ा पानी मिलाकर कुछ ही मिनटों में पौष्टिक भोजन बन जाता है. इससे समय की बचत होती है और काम पर जाने में देरी नहीं होती.

उन्होंने कहा कि अब केवल मजदूर ही नहीं, बल्कि शहरों में भी लोग सत्तू को हेल्दी डाइट के रूप में अपना रहे हैं. जिम जाने वाले युवा और डाइट पर रहने वाले लोग भी इसे प्रोटीन स्रोत मानते हैं. देसी खानपान का यह सरल रूप अब आधुनिक जीवनशैली का हिस्सा बनता जा रहा है. चने का सत्तू और आचार केवल भोजन नहीं, बल्कि मेहनतकश समाज की असली ताकत है. यह सादगी, सेहत और स्वाद का अनोखा संगम है. मजदूरों की थाली में मौजूद यह पारंपरिक आहार आज भी ऊर्जा, आत्मनिर्भरता और जीवन शक्ति का प्रतीक बना हुआ है.
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