Palamu Tiger Reserve News: पलामू टाइगर रिजर्व और हाईटेक होने जा रहा है. यहां अब AI का इस्तेमाल होगा जिससे आग लगने से लेकर, हाथियों के मूवमेंट तक की सूचना सही समय पर मिलेगी. इसकी मदद से जल्दी एक्शन लिया जा सकेगा और वन संपदा और जीवों को बचाया जा सकेगा.
सिमलीपाल के बाद दूसरा रिजर्व
वन्यजीव संरक्षण में एआई तकनीक अपनाने की शुरुआत सबसे पहले ओडिशा राज्य के मयूरभंज जिले में स्थित सिमलीपाल टाइगर रिजर्व में शुरू की गई है. जिसके बाद अब उसी तर्ज पर पलामू टाइगर रिजर्व में भी इस आधुनिक प्रणाली को लागू किया जा रहा है. इससे जंगल की निगरानी और वन्यजीव संरक्षण की व्यवस्था और मजबूत होने की उम्मीद है.
तीन इलाकों में लगाए गए एआई कैमरे
फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट के तहत रिजर्व के तीन प्रमुख इलाकों बरवाडीह, छिपादोहर और बेतला में एआई सिस्टम से लैस कैमरे लगाए गए हैं. जहां शुरुआती चरण में इन कैमरों को बफर एरिया में लगाया गया है. अगर यह प्रयोग सफल रहता है तो आने वाले समय में पूरे पलामू टाइगर रिजर्व क्षेत्र में एआई तकनीक का विस्तार किया जाएगा.
आगजनी की सूचना अब मिलेगी तुरंत
डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जेना ने लोकल18 को बताया कि गर्मी के मौसम में पलामू के जंगलों में अक्सर आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं, जिससे वन संपदा को भारी नुकसान होता है. अभी तक आग की जानकारी के लिए वन विभाग को फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के सैटेलाइट सिस्टम पर निर्भर रहना पड़ता है, जिसमें कई बार सूचना मिलने में 24 घंटे तक का समय लग जाता है. एआई तकनीक लागू होने के बाद जंगल में लगने वाली आग की जानकारी रियल टाइम में मिल सकेगी, जिससे तुरंत कार्रवाई करना संभव होगा.
हाथियों की गतिविधियों पर भी नजर
एआई कैमरों का इस्तेमाल सिर्फ आगजनी तक सीमित नहीं रहेगा. इसके माध्यम से जंगल में हाथियों के मूवमेंट की भी निगरानी की जाएगी. हाथियों की गतिविधियों की जानकारी रियल टाइम में वन अधिकारियों के साथ-साथ आसपास के ग्रामीणों तक भी पहुंचाई जाएगी, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है.
ड्रोन और हाई रेजोल्यूशन कैमरों की भी मदद
पलामू टाइगर रिजर्व में पहले से ही कई जगहों पर ड्रोन और हाई रेजोल्यूशन कैमरों से निगरानी की जा रही है. अब एआई तकनीक जुड़ने से निगरानी व्यवस्था और अधिक प्रभावी हो जाएगी. उन्होंने कहा कि इससे फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया पर निर्भरता कम होगी और आपात स्थिति में प्रतिक्रिया समय भी घटेगा.
हर साल सैकड़ों आगजनी की घटनाएं
पलामू टाइगर रिजर्व में हर साल जंगल में आग लगने की सैकड़ों घटनाएं दर्ज होती हैं. वर्ष 2024 में 370 और 2023 में 345 आगजनी की घटनाएं रिकॉर्ड की गई थीं. वहीं 2025 में यह आंकड़ा करीब 300 के आसपास रहा. हालांकि 2022 में यह संख्या 1000 से अधिक थी. गर्मी के मौसम और महुआ के सीजन में ग्रामीणों द्वारा महुआ चुनने के लिए आग लगाने से कई बार आग फैल जाती है.
200 गांवों के बीच फैला है रिजर्व
बता दें कि करीब 200 गांवों से घिरे इस टाइगर रिजर्व में आग से निपटने के लिए विशेष टीमों को अलग-अलग इलाकों में तैनात किया जाता है. सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम स्थानीय ग्रामीणों और ईको डेवलपमेंट समितियों की मदद से आग पर काबू पाने का प्रयास करती है. अब एआई तकनीक के इस्तेमाल से इस पूरे तंत्र को और अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी की जा रही है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें
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