Palamu Agricultural News : पलामू के कृषि एक्सपर्ट डॉ. अखिलेश शाह के अनुसार सब्जी की खेती के लिए दोमट या लोमी मिट्टी सबसे उपयुक्त है, जिसमें जैविक तत्व और खनिज भरपूर होते हैं, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ती है.
सब्जियां उगाने के लिए मिट्टी की गुणवत्ता सबसे अहम भूमिका निभाती है. अच्छी मिट्टी न केवल पौधों को जरूरी पोषण देती है, बल्कि उनकी जड़ों के विकास और बेहतर उत्पादन में भी मदद करती है. मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होने से फसलों के लिए बेहद लाभप्रद होता है.

पलामू जिले के कृषि विशेषज्ञ डॉ० अखिलेश शाह ने लोकल 18 को बताया कि दोमट या लोमी मिट्टी सब्जियों की खेती के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है. इसमें रेत, गाद और चिकनी मिट्टी का संतुलित मिश्रण होता है. मिट्टी की गुणवत्ता सही रहने से सब्जी की खेती में अच्छा उत्पादन होता है.

उन्होंने आगे कहा कि दोमट मिट्टी में जैविक तत्व और खनिज पर्याप्त मात्रा में होते हैं, जिससे पौधों को नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे जरूरी पोषक तत्व आसानी से मिलते हैं.
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साथ ही कहा कि इस मिट्टी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पानी को रोककर भी रखती है और जरूरत से ज्यादा पानी को बाहर निकाल देती है. इससे जड़ों में सड़न का खतरा कम हो जाता है. जो कि सब्जी के लिए अच्छा होता है.

उन्होंने कहा कि सब्जी की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे लाभप्रद होती है. दोमट मिट्टी नरम और भुरभुरी होती है, जिससे पौधों की जड़ें आसानी से फैल पाती हैं और सब्जियों का विकास बेहतर होता है.

उन्होंने कहा कि रेतीली मिट्टी खासतौर पर गाजर, मूली, शलजम जैसी जड़ वाली सब्जियों के लिए उपयुक्त मानी जाती है, क्योंकि इसमें मिट्टी सख्त नहीं होती और सब्जियां सही आकार ले पाती हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि चिकनी मिट्टी में पानी रुकने की समस्या होती है, जिससे फसल खराब हो सकती है. हालांकि, इसमें खाद और रेत मिलाकर इसे खेती के योग्य बनाया जा सकता है. जो सब्जी के खेती में सबसे अच्छा होता है.

अंत में उन्होंने कहा कि अगर किसान घर पर सब्जियां उगाने वाले लोग मिट्टी का सही चुनाव करें और उसमें जैविक खाद मिलाएं, तो सब्जियों की गुणवत्ता और पैदावार दोनों में बढ़ोतरी संभव है.
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