पाकुड़ जिले के अमड़ापाड़ा प्रखंड स्थित पचवारा नॉर्थ कोल माइंस में विस्थापितों द्वारा 9 मार्च से की गई अनिश्चितकालीन बंदी पांचवें दिन समाप्त हो गई। कोयला कंपनी के प्रतिनिधियों और प्रशासन के साथ सकारात्मक वार्ता के बाद यह निर्णय लिया गया, जिसके बाद कोयले का उत्खनन और परिवहन कार्य सुचारू रूप से फिर से शुरू हो गया है। यह बंदी अनुश्रवण एवं नियंत्रण कार्य समिति और ग्रामीणों द्वारा विस्थापितों की मांगों पर ध्यान न दिए जाने के विरोध में शुरू की गई थी। इसके चलते कोयला उत्खनन और परिवहन को अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया था। बंदी के कारण बीजीआर कंपनी को लाखों रुपए का नुकसान उठाना पड़ा। पिछले चार दिनों से विस्थापित और उनके परिजन पचवारा नॉर्थ कोल माइंस स्थित धरनास्थल पर लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान दो से तीन बार वार्ता हुई, लेकिन हर बार कोई समाधान नहीं निकल पाया। मांगों को लिखित रूप से पूरा करने का आश्वासन दिया गया अनिश्चितकालीन बंदी के पांचवें दिन एक बार फिर कोयला उत्खनन कंपनी, प्रशासन और विस्थापितों के बीच बैठक हुई। इस बैठक में विस्थापितों की मांगों को लिखित रूप से पूरा करने का आश्वासन दिया गया, जिसके बाद बंदी वापस ले ली गई। ग्रामीणों की छह सूत्री मांगों में अमड़ापाड़ा प्रखंड के बिशनपुर मौजा का समतलीकरण, बेहतर चिकित्सा सुविधा वाला अस्पताल, शिक्षा के लिए प्लस टू विद्यालय, उत्तम कामगारों के लिए प्रशिक्षण, योग्यता आधारित नियोजन में उदासीनता समाप्त करना, नौकरी का सही वेतनमान और व्यवसाय शामिल थे। इस अनिश्चितकालीन बंदी के कारण लिंक रोड पर पिछले चार दिनों से सन्नाटा पसरा रहा, जिससे कोयला उत्खनन और परिवहन पूरी तरह प्रभावित हुआ। इसका असर कोयला कंपनी से जुड़े प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लोगों पर भी पड़ा। फिलहाल, हड़ताल वापस होने से स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल है।
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