पाकुड़ और साहिबगंज में रेलवे की विभिन्न समस्याओं को लेकर पत्थर व्यवसायियों द्वारा 16 जनवरी से अनिश्चितकालीन रेलवे रेक में पत्थर लोडिंग बंद की गई है। इस बंदी के पांचवें दिन पत्थर ढुलाई पूरी तरह ठप रही। राज्य की सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने भी इस बंदी का समर्थन करते हुए घोषणा की है। जेएमएम का कहना है यदि रेलवे अधिकारियों ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो 24 जनवरी से पाकुड़ जिले के अमड़ापाड़ा प्रखंड से कोयला लोडिंग भी अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दी जाएगी। झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय सचिव पंकज मिश्रा के आह्वान पर लिट्टीपाड़ा विधानसभा के विधायक हेमलाल मुर्मू और महेशपुर विधानसभा के विधायक प्रोफेसर स्टीफन मरांडी ने कोयला ढुलाई बंद करने की घोषणा की। यात्रियों को पर्याप्त सुविधाएं देने में रेलवे विफल रही: पंकज मिश्रा लिट्टीपाड़ा विधायक हेमलाल मुर्मू ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे रेलवे की उपेक्षा अब और बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि 24 जनवरी से अमड़ापाड़ा से कोयले की ढुलाई पूरी तरह रोक दी जाएगी और इसमें कार्यकर्ताओं को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। पंकज मिश्रा ने बताया कि पाकुड़ और साहिबगंज क्षेत्र राज्य को करोड़ों-अरबों रुपए का राजस्व देते हैं, लेकिन यात्रियों को पर्याप्त सुविधाएं देने में रेलवे विफल रही है। पंकज मिश्रा ने आरोप लगाया कि रेलवे का इरादा यहां एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों को बंद करके केवल मालगाड़ियां चलाना है। पटना और दिल्ली जाने के लिए ट्रेनें उपलब्ध नहीं हैं और कई ट्रेनें इन दोनों स्टेशनों पर बिना रुके गुजर जाती हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि रेलवे की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और आम जनता इस आंदोलन के साथ है। इस आंदोलन को क्वारी ओनर एसोसिएशन, चैंबर ऑफ कॉमर्स के साथ-साथ आम जनता और मजदूरों का भी भरपूर समर्थन मिल रहा है। झारखंड मुक्ति मोर्चा का इस बंदी में शामिल होना एक बड़े आंदोलन की शुरुआत का संकेत दे रहा है। कोयला ढुलाई बंद होने से पंजाब और पश्चिम बंगाल के पावर प्लांटों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
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