पर्वतीय क्षेत्रों में होली केवल हंसी-मजाक का पर्व नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का सशक्त माध्यम रही है। स्वाधीनता संग्राम के दौरान कुमाऊंनी होली के गीतों ने महात्मा गांधी के स्वदेशी आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाया।
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