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Arhar ki Kheti se Munafa: छत्तीसगढ़ के युवा किसान लक्ष्मीकांत प्रधान ने 10 एकड़ में अरहर की ऑर्गेनिक खेती कर शानदार मुनाफा कमाया है. CG01 और दफ्तरी-48 किस्मों से प्रति एकड़ लगभग 3 क्विंटल उत्पादन हुआ और दाल 160 रुपये प्रति किलो तक बिकी. अरहर की खेती से न सिर्फ आर्थिक लाभ मिला बल्कि मिट्टी की उर्वरता में भी सुधार हुआ. फसल का 100 प्रतिशत उपयोग कर उन्होंने वेस्ट-फ्री खेती का मॉडल पेश किया है. यह कहानी टिकाऊ कृषि और ऑर्गेनिक फार्मिंग की दिशा में किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है.
दो उन्नत किस्मों ने दिया बेहतरीन रिजल्ट
लक्ष्मीकांत ने इस बार CG01 और दफ्तरी-48 किस्म लगाई. ये किस्में स्थानीय जलवायु के हिसाब से चुनी गई थीं, इसलिए फसल पर बीमारियों का असर कम रहा.
उनका कहना है कि सही किस्म चुनना ही आधी सफलता है.
मिट्टी की सेहत भी सुधरी
अरहर सिर्फ कमाई ही नहीं देती, बल्कि खेत को भी ताकत देती है. यह फसल नाइट्रोजन फिक्सेशन करती है, जिससे मिट्टी में राइजोबियम बैक्टीरिया बढ़ते हैं और जमीन की उर्वरता बनी रहती है. लक्ष्मीकांत हर साल अपनी फसल चक्र में अरहर जरूर शामिल करते हैं.
फसल का 100% इस्तेमाल
कटाई के बाद अरहर को साफ कर दाल अलग की जाती है. छिलके पशुओं के चारे में काम आते हैं और पौधों की सूखी लकड़ी गुड़ बनाने में ईंधन के रूप में इस्तेमाल होती है. लक्ष्मीकांत कहते हैं कि मेरी खेती में अरहर का एक भी हिस्सा बेकार नहीं जाता.
ऑर्गेनिक खेती से ज्यादा मुनाफा
10 एकड़ में प्रति एकड़ करीब 3 क्विंटल उत्पादन हुआ. बाजार में सामान्य अरहर दाल 140-150 रुपये किलो बिक रही है, जबकि उनकी ऑर्गेनिक दाल पिछले साल 160 रुपये किलो तक बिकी. इससे उन्हें अच्छा खासा फायदा हुआ और अब आसपास के किसान भी ऑर्गेनिक खेती की तरफ बढ़ रहे हैं.
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Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें
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