गुम्मा के एचपीएमसी केंद्र में केवल 60 बागवानों को ही मिल सका तेल, अव्यवस्था से बागवानों में रोष
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई (रोहड़ू)। पिछले वर्ष सरकार को मंडी मध्यस्थता योजना के तहत बेचे गए सेब के दामों की वसूली न होना और उसके बदले बाजार मूल्य पर आवश्यक बागवानी सामग्री उपलब्ध न करवाना, बागवानों के लिए दोहरी मार बन गया है। प्रदेश के सेब उत्पादकों की नींद हराम हो गई है। हालात यही रहे, तो आगे स्थिति उग्र होने वाली है। कड़ाके की ठंड के बीच हिमाचल प्रदेश बागवानी उपज विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (एचपीएमसी) के गुम्मा केंद्र में स्प्रे ऑयल की भारी किल्लत ने हालात बदतर कर दिए हैं। सीमित मात्रा में स्प्रे ऑयल उपलब्ध होने के कारण बागवानों को रात के अंधेरे से ही लाइन में लगना पड़ रहा है। इसके बावजूद अधिकांश को खाली लौटना पड़ रहा है। रविवार शाम गुम्मा शाखा केंद्र में मात्र 300 कैनी बीस लीटर वाले स्प्रे ऑयल पहुंचा। इसकी सूचना मिलते ही बागवान रात करीब 2:00 बजे से केंद्र के बाहर जमा होने लग गए। सुबह 7:00 बजे तक करीब 300 लोग लाइन में खड़े हो गए, जिनमें बुजुर्ग, महिलाएं और युवा भी शामिल रहे। गुम्मा केंद्र के अंतर्गत कोटखाई और चौपाल की चार पंचायतों, ठियोग क्षेत्र, मशोबरा से लेकर शिलारू तक के इलाकों से बागवान यहां पहुंचे। उन्होंने गुम्मा पहुंचने तक एक से दो घंटे वाहनों में सफर तक किया। कई लोग रात को ही होटल के कमरे किराये पर लेकर गुम्मा पहुंच चुके थे, ताकि उनको स्प्रे ऑयल उपलब्ध हो सके। नियमों के अनुसार एक बागवान को अधिकतम पांच कैनी ही दी जानी थी, लेकिन सीमित स्टॉक के चलते केवल लगभग 60 बागवानों को ही स्प्रे ऑयल मिल सका। कई बागवानों को निराश लौटना पड़ा। बागवानों का कहना है कि स्प्रे ऑयल सेब की बागवानी के लिए अत्यंत आवश्यक है , इसकी कमी सीधे तौर पर फसल और आय पर असर डालती है। इस अव्यवस्था को लेकर बागवानों में भारी रोष है। उनका आरोप है कि सरकार और एचपीएमसी प्रबंधन जमीनी हकीकत से कटे हुए हैं। बागवानों ने मांग की है कि सभी केंद्रों में तुरंत पर्याप्त मात्रा में स्प्रे ऑयल और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध करवाई जाए। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो वे उग्र प्रदर्शन करेंगे और चक्का जाम करने के लिए मजबूर होंगे।
स्प्रे ऑयल और अन्य सामान लेने एचपीएमसी गुम्मा शाखा केंद्र पहुंचा था, लेकिन एचपीएमसी में सिर्फ स्प्रे ऑयल ही उपलब्ध हो रहा है, वह भी नाम मात्र। इसके अलावा कोई सामान उपलब्ध नहीं हो रहा। इस तरह की व्यवस्था बागवानों के लिए चिंताजनक है। इस तरह की व्यवस्था पहली बार देखने को मिल रही है। —ओम प्रकाश शर्मा, मतियाना ठियोग, बागवान
रात करीब 3 बजे एचपीएमसी गुम्मा केंद्र के बाहर पहुंच गई थीं, लेकिन वहां उनसे पहले ही कई लोग लाइन में खड़े थे। सरकार की यह व्यवस्था ठीक नहीं है। पहले एचपीएमसी केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में उत्पाद उपलब्ध करवाए जाएं, उसके बाद ही लोगों को वितरण किया जाए। —अंजू डोगरा,
गांव चमैन (कलबोग)।
स्प्रे ऑयल लेने के लिए अब तक तीन बार गुम्मा एचपीएमसी केंद्र के चक्कर लगा चुके हैं। पहले दो बार खाली हाथ लौटना पड़ा। तीसरी बार मजबूरी में देर रात करीब 2:00 बजे कड़ाके की ठंड में केंद्र के बाहर पहुंचना पड़ा। मरीज होने के के साथ पहले हार्ट सर्जरी भी हो चुकी है। इसके बावजूद उन्हें स्प्रे ऑयल पाने के लिए रात भर लाइन में खड़ा रहना पड़ा। —बिशन सिंह, गांव जहार कोटखाई, बागवान।
बागवान ओम प्रकाश शर्मा ठियोग मतयाना। संवाद

बागवान ओम प्रकाश शर्मा ठियोग मतयाना। संवाद

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