नववर्ष 2026 के पहले दिन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की धार्मिक यात्रा अब नर्मदा अंचल में चर्चा का विषय बन गई है। 1 जनवरी को मुख्यमंत्री खंडवा जिले के मोरटक्का-खेड़ी घाट क्षेत्र स्थित राजराजेश्वरी मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने सपत्नीक पूजा-अर्चना की और कन्याओं को भोजन कराया। इसके बाद वे हेलीकॉप्टर से रवाना हो गए। हालांकि ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग से मात्र 12 किलोमीटर की दूरी पर होने के बावजूद मुख्यमंत्री का यहां आकर दर्शन न करना कई सवाल खड़े कर गया।
जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे विशेष रूप से बनाए गए नवनिर्मित हेलीपैड पर उतरे। उसी समय उनके पुत्र डॉ. अभिमन्यु यादव और बहू डॉ. इशिता यादव ओंकार पर्वत और नर्मदा परिक्रमा पूर्ण कर ओंकारेश्वर से लौट रहे थे। मुख्यमंत्री कुछ समय सड़क मार्ग स्थित एक फार्म हाउस पर रुके और इसके बाद सीधे खेड़ी घाट स्थित राजराजेश्वर मंदिर पहुंचे। पूजा-पाठ के बाद वे पुनः हेलीपैड पहुंचकर रवाना हो गए। करीब एक घंटे बाद उनके पुत्र-बहू खेड़ी घाट पहुंचे और मंदिर में पूजा कर कन्याभोज कराया।
मुख्यमंत्री के आगमन और प्रस्थान के दौरान इंदौर-इच्छापुर-खंडवा राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात दो बार रोका गया। वाहनों को नर्मदा एक्वाडक्ट नहर पुल से डायवर्ट किया गया। खास बात यह रही कि अस्थायी हेलीपैड तैयार किया गया, जिस पर लाखों रुपये खर्च होने की चर्चा है, जबकि क्षेत्र में पहले से ही बड़वाह-नावघाटखेड़ी मोरटक्का पुल के पास दादा दरबार और ओंकारेश्वर से करीब चार किलोमीटर दूर शिव कोठी क्षेत्र में स्थायी हेलीपैड मौजूद हैं।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन नहीं चाहता था कि मुख्यमंत्री ओंकारेश्वर-मोरटक्का मार्ग की वास्तविक स्थिति देखें। सड़क निर्माण कार्य के नाम पर कई स्थानों पर मार्ग खोदकर छोड़ दिया गया है, जिससे श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में नया मार्ग और नया हेलीपैड चुने जाने को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
इधर पिछले एक माह से ओंकारेश्वर में ममलेश्वर लोक निर्माण कार्य को लेकर अव्यवस्था और असंतोष की स्थिति बनी हुई है। बीते पांच दिनों से नर्मदा नदी में नौकाओं का संचालन भी बंद है, जिससे श्रद्धालुओं और नाविकों में नाराजगी है। चर्चा यह भी है कि इन मुद्दों पर संभावित जनआक्रोश से बचने के लिए मुख्यमंत्री का ओंकारेश्वर दर्शन कार्यक्रम नहीं बनाया गया। नर्मदा अंचल में प्रचलित जनविश्वास के अनुसार ओंकारेश्वर के समीप आकर दर्शन न करना शुभ संकेत नहीं माना जाता, जिसे लेकर भी स्थानीय स्तर पर चर्चाएं हो रही हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के बड़े भक्त माने जाते हैं और सनातन परंपराओं में उनकी आस्था सर्वविदित है। ऐसे में वर्ष के प्रथम दिन ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन न करना स्वाभाविक रूप से कई सवाल खड़े कर गया है। कुल मिलाकर मुख्यमंत्री की यह यात्रा जहां निजी धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित रही, वहीं ओंकारेश्वर न जाने को लेकर यह दौरा चर्चा और सवालों के साथ समाप्त हुआ।
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