ऑटो चालक, लेकिन पहचान बनी ‘राधा रानी के भक्त’
आकाश वैष्णव पेशे से एक साधारण ऑटो चालक हैं, लेकिन उनकी पहचान अब उनकी गहरी आस्था से बन रही है. उनके ऑटो में राधा रानी की प्रतिमा सदा विराजमान रहती है. साथ ही वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज के पोस्टर भी ऑटो में लगे हुए हैं. सवारी बैठते ही सबसे पहले उनकी नजर राधा रानी पर पड़ती है, जिससे माहौल स्वतः ही भक्तिमय हो जाता है.
राधा रानी को गार्डन घुमाने पहुंचे, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
हाल ही में आकाश राधा रानी को शहर के सबसे पुराने कंपनी गार्डन में घुमाने लेकर पहुंचे. गार्डन में मौजूद महिला, पुरुष और बुजुर्ग जब इस दृश्य से रूबरू हुए तो कई लोग दर्शन करने के लिए रुक गए. आकाश राधा रानी को झूला झुलाते नजर आए, जिसे देखने के लिए आसपास भीड़ जमा हो गई. कई लोगों ने उनकी आस्था की सराहना की और इसे सनातन संस्कृति की सुंदर झलक बताया.
“माता को घर पर अकेला नहीं छोड़ सकता” – आकाश
आकाश का कहना है कि वे राधा रानी को घर पर अकेला नहीं छोड़ सकते. उनका विश्वास है कि माता से दूर रहकर वे सहज महसूस नहीं करते. वे बताते हैं कि रोज सुबह 5 बजे उठकर पहले स्वयं स्नान करते हैं, फिर राधा रानी को स्नान कराकर तैयार करते हैं. इसके बाद भोग लगाते हैं और फिर ऑटो में उन्हें साथ लेकर सवारी के लिए निकलते हैं.
दिन में तीन बार भोग लगाने के बाद ही वे स्वयं भोजन ग्रहण करते हैं. हर सवारी से पहले वे माता का स्मरण करते हैं. जो यात्री इस बारे में नहीं जानते, वे पूछते हैं तो आकाश उन्हें बताते हैं कि यह उनकी आराध्य राधा रानी हैं, जिन्हें वे जीवन भर अपने साथ रखेंगे.
प्रेमानंद महाराज से मिली प्रेरणा
आकाश बताते हैं कि उन्हें यह प्रेरणा वृंदावन के प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज से मिली. महाराज से मिलने के बाद वे दो बार बरसाना भी जा चुके हैं. वहीं से उनकी भक्ति और गहरी हुई और उन्होंने राधा रानी को जीवन का अभिन्न हिस्सा बना लिया.
आज उनकी यह अनोखी भक्ति शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है.
“जिसे राधा रानी मिल जाए, वह सौभाग्यशाली” – रम्भा देवी
गार्डन घूमने आई रम्भा देवी ने कहा कि जिस तरह आकाश राधा रानी को अपने साथ रखते हैं, वह दृश्य बेहद आनंदित करने वाला है. उन्होंने कहा, “माता राधा हर किसी के पास नहीं आतीं, जिसके पास आती हैं वह बहुत सौभाग्यशाली होता है. आज के समय में युवाओं का सनातन धर्म और भक्ति की ओर झुकाव देखना अच्छा लगता है.”
बिलासपुर में आकाश वैष्णव की यह अनोखी भक्ति न सिर्फ लोगों को आकर्षित कर रही है, बल्कि यह संदेश भी दे रही है कि आस्था और मेहनत साथ-साथ चल सकती है. सड़क पर दौड़ता एक साधारण ऑटो आज भक्ति और श्रद्धा का चलता-फिरता प्रतीक बन गया है.
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