इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज एंड इंजीनियर (NCCOEEE) के वरिष्ठ सदस्य सुभाष लांबा।
इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज एंड इंजीनियर (NCCOEEE) के वरिष्ठ सदस्य सुभाष लांबा ने संसद से हाल ही में पास किए गए न्यूक्लियर एनर्जी (शांति) विधेयक का कड़ा विरोध किय
उन्होंने बताया कि इस कानून के जरिए सरकार ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी और विदेशी कंपनियों के लिए खोल दिया है। पहले इस क्षेत्र पर सरकार का सख्त नियंत्रण था, क्योंकि परमाणु ऊर्जा में दुर्घटना होने पर बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है।
अपनी मांगों को लेकर आंदोलन करते कर्मचारी। फाइल फोटो।
15 जनवरी को जींद में आंदोलन
लांबा ने बताया कि नए कानून में यह सुरक्षा व्यवस्था कमजोर कर दी गई है। उन्होंने बताया कि न्यूक्लियर एनर्जी कानून, चार लेबर कोड्स व किसान विरोधी बीज बिल के खिलाफ 15 जनवरी को जींद में महासम्मेलन आयोजित किया जाएगा। जिसमें हजारों की संख्या में कर्मचारी, सेंट्रल ट्रेड यूनियन से जुड़े मजदूर व संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े किसान शामिल होंगे। महासम्मेलन में सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन का फैसला लिया जाएगा।
आंदोलन को सफल बनाने की इन्हें मिली जिम्मेदारी
महासम्मेलन के सफल आयोजन के लिए स्थानीय स्तर पर अन्य सभी संगठनों से समन्वय स्थापित करने के लिए ऑल हरियाणा पावर कारपोरेशनज वर्कर यूनियन के राज्य प्रधान सुरेश राठी व सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के जिला प्रधान संजीव डांडा को इंचार्ज बनाए गए हैं।राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुभाष लांबा ने न्यूक्लियर एनर्जी से जुड़ा नये कानून (शांति) के बारे बताया कि अगर किसी निजी कंपनी द्वारा चलाए जा रहे परमाणु संयंत्र में दुर्घटना होती है, तो उसका नुकसान कंपनियों की बजाय आम जनता और सरकार को उठाना पड़ेगा। यानी मुनाफा निजी कंपनियों का होगा और जोखिम जनता का।
दुर्घटना होने पर रेडिएशन फैलेगा
परमाणु दुर्घटना होने पर निकलने वाला रेडिएशन हवा, पानी और जमीन के जरिए बहुत दूर तक फैल सकता है, जिससे लाखों लोगों की सेहत और आने वाली पीढ़ियों पर भी बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए पहले इस क्षेत्र को निजी हाथों में नहीं दिया गया था।
उन्होंने यह भी बताया कि विदेशी कंपनियां पहले भारत के कड़े कानूनों की वजह से यहां निवेश नहीं करना चाहती थीं। अमेरिका समेत कुछ देशों के दबाव में सरकार ने अब कानून बदल दिया है, जिससे कंपनियों को फायदा हो और जनता को नुकसान। उन्होंने कहा कि निजी कंपनियां सिर्फ मुनाफा देखती हैं, ऐसे में सुरक्षा से समझौता हो सकता है।
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