Solar Light Trap: झारखंड के हजारीबाग की सुमित्रा देवी ने खेती में नवाचार की एक नई मिसाल पेश की है. उन्होंने मात्र 3 हजार रुपये की सोलर लाइट ट्रैप मशीन का उपयोग कर बिना किसी महंगे रासायनिक कीटनाशक के कीटों पर प्रभावी नियंत्रण पाने में सफलता हासिल की है. इस तकनीक से न केवल खेती की लागत कम हुई है, बल्कि फसलों की पैदावार भी बढ़ी है. जानें कैसे सौर ऊर्जा से चलने वाली यह छोटी सी मशीन किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है.
सामान्य रूप से किसान इन कीटों से बचाव के लिए रासायनिक कीटनाशकों का छिड़काव करते हैं. इससे कुछ समय के लिए कीटों पर नियंत्रण तो मिल जाता है, लेकिन लंबे समय में इसके कई नकारात्मक प्रभाव सामने आते हैं. कीटनाशकों के अधिक उपयोग से खेती की लागत बढ़ जाती है, मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होती है और कई बार फसल में जहरीले तत्व भी बढ़ जाते हैं. ऐसी फसल का सेवन करना आगे चलकर लोगों की सेहत के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है.
बिना रासायन कीट-पतंगों से फसल रहेगा सुरक्षित
इन्हीं समस्याओं को देखते हुए अब झारखंड के हजारीबाग जिले के किसान धीरे-धीरे पर्यावरण के अनुकूल और कम लागत वाली तकनीकों की ओर रुख कर रहे हैं. जिले के चरही प्रखंड क्षेत्र के चनारों गांव की महिला किसान सुमित्रा देवी के ने भी कीट नियंत्रण के लिए एक प्रभावी और सुरक्षित तरीका अपनाया है. जिससे बिना रासायनिक प्रयोग किए हुए इन कीट पतंगों से फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है.
खर्च और खेत दोनों की बचत
लोकल 18 झारखंड से बातचीत करने के दौरान सुमित्रा देवी ने बताया कि फसलों में कीटों का आना ससामान्य बात है. हर मौसम में इसका प्रभाव देखने को मिलता है. ऐसे समय में किसान मजबूरी में बार-बार कीटनाशकों का छिड़काव करते हैं, जिससे खर्च भी बढ़ता है और खेती पर इसका नुकसान देने वाला असर भी पड़ता है. रासायनिक कीटनाशक किसी स्थायी समाधान का विकल्प नहीं हैं. बार-बार दवा छिड़कने से लागत तो बढ़ती ही है, साथ ही पर्यावरण और फसल दोनों को नुकसान पहुंचता है.
खास लाइट ट्रैप किया गया तैयार
उन्होंने आगे बताया कि कीट की समस्या से बचने के लिए समस्या का समाधान खोजते हुए उन्होंने अपने खेतों में सोलर लाइट ट्रैप का इस्तेमाल शुरू किया है. यह ट्रैप कीट पतंगों को रोकने में बेहद मददगार साबित होते है. इसके पीछे का मुख्य कारण है कि ज्यादातर कीट-पतंगे रात के समय अधिक सक्रिय रहते हैं. इसी करण से सोलर लाइट ट्रैप को तैयार किया गया है.
उन्होंने आगे बताया कि इस उपकरण को उन्होंने बाजार में 3000 रुपए में खरीदा था. यह उपकरण सौर ऊर्जा से संचालित होता है और रात में रोशनी देता है. नीली और पीली रोशनी की ओर आकर्षित होकर कीट-पतंगे इसके पास आ जाते हैं. लाइट के ठीक नीचे पानी से भरी एक ट्रे लगाई जाती है. रोशनी की ओर आते हुए कीट उसमें गिर जाते हैं और नष्ट हो जाते हैं. इस पूरी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार के रासायनिक कीटनाशक का इस्तेमाल नहीं होता, जिससे फसल पूरी तरह सुरक्षित रहती है.
एक एकड़ के लिए दो लाइट पर्याप्त
सुमित्रा देवी ने आगे बताया कि एक एकड़ खेत में दो सोलर लाइट ट्रैप पर्याप्त होते हैं. बाजार में इसकी कीमत करीब एक हजार रुपये से शुरू होती है और क्षमता के अनुसार बढ़ती जाती है. उनके खेत में लगाया गया सोलर लाइट ट्रैप लगभग तीन हजार रुपये का है. यह एक बार का निवेश है, जिसे हल्के रखरखाव के साथ कई वर्षों तक उपयोग में लाया जा सकता है. इससे किसानों की लागत कम होती है, फसल सुरक्षित रहती है और पर्यावरण पर भी कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता.
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