भनपुरी के गंगानगर स्थित आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल में हाल ही में बकाया बिजली बिल के कारण पांच दिनों तक बिजली आपूर्ति बंद रही। स्कूल पर करीब 80 हजार रुपए का बिजली बिल लंबित था।
बिजली नहीं होने से पढ़ाई प्रभावित हुई और मजबूरी में दो दिन की छुट्टी घोषित करनी पड़ी। स्कूल प्रबंधन ने इसकी सूचना डीईओ को दी और बिजली विभाग को पत्र लिखकर सप्लाई बहाल करने का अनुरोध किया। प्रक्रिया पूरी होने के बाद स्कूल में दोबारा बिजली शुरू हो सकी।
यह समस्या सिर्फ इसी स्कूल तक सीमित नहीं है। राजधानी के 21 आत्मानंद स्कूलों पर पिछले कई वर्षों से कुल 49.74 लाख का बिल लंबित है। दूसरी ओर स्कूल प्राचार्यों का कहना है कि जब विभाग की ओर से ही संचालन के लिए पर्याप्त राशि नहीं मिल रही है, तो बिजली बिल का भुगतान कैसे किया जाए। इस बीच डीपीआई ने भी डीईओ को पत्र भेजकर स्कूलों में बिजली बिल बकाया होने का कारण पूछा है।
एक साल में 1.79 लाख, कैसे चल पाएंगे स्कूल
एक साल में सिर्फ 1.79 लाख, संचालन पर संकट शहर में संचालित 36 आत्मानंद स्कूल गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। इन स्कूलों को संचालन के लिए पहले सालाना 5 लाख रुपए की राशि मिलती थी, लेकिन बीते तीन वर्षों से यह घटकर केवल 1.79 लाख रुपए रह गई है। इसी सीमित फंड से हिंदी और अंग्रेजी, दोनों माध्यमों के स्कूलों का संचालन किया जा रहा है।
उधार में हो रहे प्रैक्टिकल, दुकानदार कर रहे तकादा इन दिनों हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी के छात्रों के प्रैक्टिकल चल रहे हैं। कई स्कूलों ने प्रैक्टिकल के लिए आवश्यक सामग्री उधार में खरीदी है। कुछ प्राचार्यों ने बताया कि सामग्री का बिल डीईओ कार्यालय भेजा गया है, लेकिन अब तक स्वीकृति नहीं मिल पाई है। हालात ऐसे हैं कि दुकानदार रोजाना स्कूल पहुंचकर भुगतान की मांग कर रहे हैं, जिससे स्कूल प्रबंधन की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
स्कूलों का बिजली बिल बकाया है, इसके लिए जानकारी मंगाई गई है। सभी स्कूलों के बकाया बिल के लिए बजट की मांग की गई है। जैसे ही बजट आता है, बिल चुकाया जाएगा। – हिमांशु भारतीय, डीईओ
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