पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक तापमान तेजी से चढ़ रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में सत्ता परिवर्तन के अपने मिशन को धार देने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। इसी क्रम में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सोमवार से दो दिवसीय दौरे पर पश्चिम बंगाल पहुंच रहे हैं। यहां वे कूच बिहार के रासमेला मैदान से परिवर्तन यात्रा का शुभारंभ करेंगे। यह यात्रा 2 मार्च को पांच अलग-अलग स्थानों से और 3 मार्च को चार अन्य स्थानों से निकाली जा रही है। इसका मकसद तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ सत्ता-विरोधी माहौल को और मजबूत करना तथा सीधे जनसंपर्क के जरिए मतदाताओं तक पहुंच बनाना है। किशनगंज से सटे इस्लामपुर और चोपड़ा में पहुंचेगी यात्रा बीजेपी की यह राजनीतिक यात्रा सिर्फ कूच बिहार तक सीमित नहीं रहेगी। किशनगंज जिले से जुड़े सीमा क्षेत्रों—इस्लामपुर और चोपड़ा—में भी यात्रा का पड़ाव तय किया गया है। इससे सीमावर्ती बिहार में भी चुनावी सरगर्मी महसूस की जा रही है। किशनगंज और उत्तर बंगाल की राजनीतिक कनेक्टिविटी को देखते हुए बीजेपी यहां भी माहौल गर्म करने की कोशिश में है। टीपी झाड़ी में उतरेगा नितिन नवीन का हेलीकॉप्टर किशनगंज बीजेपी जिला अध्यक्ष गोपाल मोहन सिंह ने पुष्टि की कि नितिन नवीन का हेलीकॉप्टर किशनगंज जिले के पोठिया प्रखंड के टीपी झाड़ी में उतरेगा। वहां से वे सड़क मार्ग से इस्लामपुर के लिए रवाना होंगे। सिंह ने कहा, बंगाल फतह की पूरी तैयारी है। इस बार बंगाल की जनता ममता बनर्जी की सरकार को उखाड़ फेंकेगी। उन्होंने बताया कि नितिन नवीन के इस दौरे ने किशनगंज के भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह भर दिया है। हालांकि बिहार में उनकी कोई सभा प्रस्तावित नहीं है, लेकिन बंगाल जाते समय जिले में उनके हेलीकॉप्टर लैंडिंग को लेकर स्थानीय कार्यकर्ताओं में काफी ऊर्जा है। किशनगंज के कार्यकर्ता भी होंगे हिस्सा जिला अध्यक्ष गोपाल मोहन सिंह ने बताया कि बीजेपी की ‘परिवर्तन यात्रा’ में किशनगंज के कई कार्यकर्ता भी शामिल होंगे। वे पश्चिम बंगाल में पार्टी की जीत सुनिश्चित करने के लिए जमीनी स्तर पर सक्रिय रहेंगे। सिंह ने कहा, किशनगंज के कार्यकर्ता बंगाल के चुनाव में अहम भूमिका निभाएंगे। सीमावर्ती क्षेत्रों में ममता सरकार के खिलाफ जनता में नाराजगी है। बीजेपी इस बार मजबूत विकल्प के रूप में तैयार है। परिवर्तन यात्रा से बढ़ा राजनीतिक मुकाबला बीजेपी की इस यात्रा के चलते उत्तर बंगाल में राजनीतिक मुकाबला और तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस भी प्रतिरोध में अपनी सभाएं और जनसंपर्क अभियान चला रही है। दोनों दल सीमावर्ती इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में हैं। चुनाव की तारीखों की घोषणा से पहले ही बंगाल में राजनीतिक रैलियों की बाढ़ आ गई है। ‘परिवर्तन यात्रा’ को बीजेपी चुनावी रणनीति के बड़े हथियार के तौर पर देख रही है।
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