सीवान से जुड़ी संपत्तियों पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने कार्रवाई की है। हाईकोर्ट के आदेश के तहत धोखे और अपराध से कमाई गई संपत्तियों को अटैच किया गया है। इनमें एक संपत्ति महाराष्ट्र में और दूसरी सीवान जिले में स्थित जमीन बताई जा रही है।
यूएपीए के प्रावधानों के तहत कार्रवाई
एनआईए अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के प्रावधानों के तहत की गई है। इस कानून के अंतर्गत आतंकवाद, संगठित अपराध और उनसे जुड़ी अवैध कमाई से अर्जित संपत्तियों को अटैच करने का प्रावधान है।
विशेष अदालत से अनुमति के बाद कदम
पटना स्थित एनआईए की विशेष अदालत से अनुमति मिलने के बाद एजेंसी ने यह कार्रवाई की। एनआईए का कहना है कि आरोपी ने अपराध से अर्जित धन को छिपाने के उद्देश्य से संपत्तियां अपनी पत्नी के नाम पर खरीदी थीं।
कंबोडिया भेजने का झांसा देकर अपराध में धकेलने का आरोप
जांच में सामने आया है कि यह गिरोह भारत से युवाओं को विदेश में नौकरी का झांसा देकर कंबोडिया भेजता था। वहां पहुंचने के बाद उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए जाते थे और उन्हें साइबर फ्रॉड, ऑनलाइन ठगी और डिजिटल स्कैम जैसे अपराधों में जबरन शामिल किया जाता था।
शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के आरोप
एनआईए के अनुसार, कई मामलों में पीड़ितों को शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का भी सामना करना पड़ा। इस नेटवर्क के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित अपराध को अंजाम दिया जा रहा था।
एजेंसी का कहना है कि यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले मानव तस्करी और साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़ा है, जिसके तार कई देशों से जुड़े हो सकते हैं। एनआईए आरोपी आनंद कुमार सिंह की गिरफ्तारी के लिए अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय कर रही है।
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अन्य आरोपियों और वित्तीय लेनदेन की पड़ताल
एनआईए ने बताया कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों, वित्तीय लेन-देन और विदेशों में मौजूद ठिकानों की भी गहन जांच की जा रही है। एजेंसी के अनुसार संगठित अपराध की आर्थिक रीढ़ तोड़ना जांच का अहम उद्देश्य है।
एनआईए ने दोहराया है कि ऐसे मामलों में अवैध कमाई से बनाई गई संपत्तियों को जब्त करना पीड़ितों को न्याय दिलाने और संगठित अपराध पर प्रभावी कार्रवाई की दिशा में जरूरी कदम है।
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