प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब स्थानीय लोगों की नजर खाली प्लॉट की ओर गई तो वहां कुत्ते नवजात के शव को नोंचते नजर आए। यह दृश्य देखकर लोग सन्न रह गए और तुरंत कुत्तों को वहां से भगाने का प्रयास किया। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर इकट्ठा हो गए और स्थिति को संभालने की कोशिश की गई।
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घटना की सूचना मिलने पर समाजसेवी आदर्श तिवारी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि लोगों ने कुत्तों को भगाकर शव को सुरक्षित करने का प्रयास किया। उनके अनुसार यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अमानवीय घटना है। उन्होंने बताया कि जिस स्थान पर नवजात का शव मिला है, उसके आसपास ही जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज स्थित है। लगभग पांच दिनों पहले भी 100 मीटर दूर ईदगाह चौराहे पर भी एक नवजात बच्चे का शव मिला था, उसको भी कुत्ते द्वारा नोंचा जा रहा था। आज जो शव मिला है उस नवजात के सिर नहीं था, जिसको कुत्ते ने खा लिया था। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि नवजात की मृत्यु होने के बाद दफनाने की जगह रेलवे लाइन के पास दीवाल के पीछे फेंक दिया जाता है। बच्चे के पैर में पूनम और दीपक लिखा है जो कि हॉस्पिटल में नवजात बच्चों की पहचान के लिए लिखा जाता है। फिलहाल मामले की सूचना पुलिस को दे दी है।
हालांकि इस मामले में अभी तक किसी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और पूरे मामले की जांच की आवश्यकता बताई जा रही है। गौरतलब है कि पांच दिन पहले भी इसी क्षेत्र के पास सांची रोड पर एक खाली प्लॉट में नवजात शिशु का शव मिला था। उस समय भी कुत्ते शव को नोंचते पाए गए थे, जिससे इलाके में भारी आक्रोश और चिंता का माहौल बन गया था। लगातार दूसरी बार ऐसी घटना सामने आने से स्थानीय लोगों में डर और आक्रोश दोनों देखने को मिल रहे हैं। इस तरह की घटनाएं प्रशासनिक निगरानी और अस्पतालों की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े करती हैं। समाजसेवी आदर्श तिवारी ने मांग की पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी अमानवीय घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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