Gehu Farming Important Tips: गेहूं की बुवाई करने के लिए अब लेट हो गया है लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो अब भी गेहूं बोया जा सकता है. इन चीजों का ध्यान रखने से अच्छी उपज होगी और देरी होने का प्रभाव नहीं पड़ेगा.
15 दिसंबर के बाद भी हो सकती है बुआई
दरअसल, गेहूं की खेती में किसानों के लिए सही तकनीक की जानकारी होना बेहद जरूरी है. कई बार धान की देर से कटाई होने के कारण खेत समय पर तैयार नहीं हो पाता है, जिससे गेहूं की बुआई में देरी हो जाती है. पलामू जिले के चियांकी स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. अखिलेश शाह ने लोकल 18 को बताया कि अगर बुआई में देर हो रही है, तो भी किसान 15 दिसंबर के बाद गेहूं की बुआई कर सकते हैं.
देर से बुआई तो ज्यादा लगेंगे बीज
वे आगे बताते हैं कि अगर किसान 15 दिसंबर के बाद गेहूं की बुआई कर रहे हैं, तो प्रति हेक्टेयर सामान्य स्थिति में जहां 100 किलो बीज की जरूरत होती है, वहीं देर से बुआई करने पर बीज की मात्रा 25 प्रतिशत बढ़ाकर 125 किलो प्रति हेक्टेयर कर देनी चाहिए. इससे गेहूं की फसल अच्छी तरह तैयार होती है और उत्पादन भी लगभग अच्छा मिलता है. चूंकि बुआई देर से की जा रही होती है, इसलिए बीज की मात्रा बढ़ाना जरूरी हो जाता है.
बोने के पहले करें उपचार
उन्होंने यह भी कहा कि गेहूं की बुआई कभी भी करें, लेकिन बीज उपचार जरूर करना चाहिए. जैसे बच्चों के जन्म के बाद टीकाकरण जरूरी होता है, वैसे ही किसी भी फसल की बुआई से पहले बीज उपचार आवश्यक होता है. इससे फसल को होने वाले रोगों से बचाव होता है, बीज खराब नहीं होता और कीटों के प्रकोप से भी सुरक्षा मिलती है.
इसके लिए किसान साफ नामक दवा को 2 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से मिलाकर बुआई से करीब 4 घंटे पहले बीज को सुखा लें, इसके बाद बुआई करें. इससे उनमें रोग लहगने की संभावना कम हो जाती है और फसल सुरक्षित रहती है.
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